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पटना 11 अप्रैल 2022, ज्योतिबा फुले की जन्म जयंती देष में इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। समाज में व्यापक जातिवाद को खत्म करने के लिये जो कार्यक्रम उन्होंने चलाये वो आज के दौर में भी प्रासंगिक लगते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में चल रही सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि समाज में शोषित, वंचित तथा पिछले पायदान पर खड़े लोगों के जीवन में उसी प्रकार प्रयास किया जा रहा है। जैसे 19वीं शताब्दी में ज्योतिबा फुले जी ने भी किया था।

ज्योतिबा फुले ने महिलाओं की शिक्षा कि वकालत की थी और नरेन्द्र मोदी की सरकार ने भी नई शिक्षा नीति के तहत हर महिला के लिये समान शिक्षा की व्यवस्था की है जिसमें किसी प्रकार की गैर-बराबरी नहीं होगी। देशभर में स्वयं सहायता समुहों का गठन किया गया है, 2021-2022 में 28 लाख सेल्फ हेल्प समुहों का गठन हुआ है तथा उन्हें 65 हजार करोड़ रूपये की मदद भी उपलब्ध करायी गयी है और उनका आर्थिक तौर पर सशक्तिकरण किया गया है।

समाज के कमजेार तबके के लोगों ने नरेन्द्र मोदी जी के तरफ स्नेहिल दृष्टिकोण रखा है और दो बार प्रधानमंत्री बनाने में योगदान दिया है, उसी प्रकार नरेन्द्र मोदी जी ने भी सफाईकर्मियों के पैर धोकर समाज में मुख्यधारा से जोड़ने के तरफ कदम बढ़ाया है। उसी प्रकार उषा चैमार, राही बाई सोभा पोपटे, सिधुर्ताअ सपकल, बिस्बाला रमा, भागीरथी देवी तथा चुरनी देवी जेसे समाज के हाषिये पर काम कर रही महिलाओं को देष सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री जैसे सम्मान से सम्मानित करना नरेन्द्र मोदी जैसे विराट व्यक्तित्व के दर्शन को परिलक्षित करता है।

उन्होंने कहा कि जनधन खातों से जो समाज के कमजोर तबके को मजबुत करने की मुहिम शुरू हुई वह इज्जत घर, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0, फ्री सिलाई मशीन योजना जैसी कई योजनाओं के माध्यम से लगातार सामाजिक समायोजन से जोड़ा जा रहा है। देश को जाति की राजनीति से बांटकर दशकों तक शासन करने वालों लोगों से अनेकों सवाल है। गुरु प्रकाश ने ये भी पूछा कि उन्हें यह बताना चाहिए कि अलग-अलग जातियों को अपना बंधुआ वोटबैंक समझने वालों के शासन में संबंधित जातियों का सर्वांगिण विकास क्यों नहीं हुआ?

प्रेस वार्ता में प्रवक्ता संजय टाईगर, संतोष पाठक, मीडिया प्रभारी अषोक भट्ट एवं राकेश सिंह मौजूद थे।

By anandkumar

आनंद ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की है और मास्टर स्तर पर मार्केटिंग और मीडिया मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। उन्होंने बाजार और सामाजिक अनुसंधान में एक दशक से अधिक समय तक काम किया। दोनों काम के दायित्वों के कारण और व्यक्तिगत हित के रूप में उन्होंने पूरे भारत में यात्रा की। वर्तमान में, वह भारत के 500+ जिलों में अपना टैली रखता है। पिछले कुछ वर्षों से, वह पटना, बिहार में स्थित है, और इन दिनों संस्कृत में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहें है। एक सामग्री लेखक के रूप में, उनके पास OpIndia, IChowk, और कई अन्य वेबसाइटों और ब्लॉगों पर कई लेख हैं। भगवद् गीता पर उनकी पहली पुस्तक "गीतायन" अमेज़न पर लॉन्च होने के पांच दिनों के भीतर स्टॉक से बाहर हो गई।

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