पहले चाय की दुकानपहले चाय की दुकान

पहले चाय की दुकान पे सिर्फ ‘चाय’ बिकती थी वो भी एक नम्बर क्वालिटी की।

फिर बिस्कुट, टोस्ट भी बिकने लगे,

फिर धीरे-धीरे सिगरेट भी बिकने लगी,

फिर किसी ने गुटका बेचने की भी सलाह दे डाली,

अब एक काऊंटर कोल्ड ड्रिंक का भी लग गया,
एक साहब ने कहा कि सिर दर्द,पेट दर्द की गोलियाँ भी रखलो।इस पर भी अमल किया गया।गोलियां भी बिकने लगीं।

इतना मैनेज करने में व्यस्तता के कारण ‘चाय’ की क्वालिटी खराब हो गई अतः ग्राहक कम होते गए।
चाय का काम ठप्प पड़ गया।
अब दुकान पर चाय छोड़कर सब कुछ मिलता है।

विद्यालयों में भी पहले केवल अध्यापन हुआ करता था…
समझ गए ना???

By Shubhendu Prakash

शुभेन्दु प्रकाश 2012 से सुचना और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र मे कार्यरत है साथ ही पत्रकारिता भी 2009 से कर रहें हैं | कई प्रिंट और इलेक्ट्रनिक मीडिया के लिए काम किया साथ ही ये आईटी services भी मुहैया करवाते हैं | 2020 से शुभेन्दु ने कोरोना को देखते हुए फुल टाइम मे जर्नलिज्म करने का निर्णय लिया अभी ये माटी की पुकार हिंदी माशिक पत्रिका में समाचार सम्पादक के पद पर कार्यरत है साथ ही aware news 24 का भी संचालन कर रहे हैं , शुभेन्दु बहुत सारे न्यूज़ पोर्टल तथा youtube चैनल को भी अपना योगदान देते हैं | अभी भी शुभेन्दु Golden Enterprises नामक फर्म का भी संचालन कर रहें हैं और बेहतर आईटी सेवा के लिए भी कार्य कर रहें हैं |

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