जापान क्रेडिट रेटिंग एजेन्सी (जेसीआरए) ने भारत की सार्वभौम (सावरेन) क्रेडिट रेटिंग में सुधार करते हुए इसे BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया है। भारत की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग में बढ़ौतरी कई कारणों के चलते की गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार विकास के पथ पर तेजी से दौड़ रही है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर बनी हुई है। भारत आज पूरे विश्व में समस्त बड़े देशों के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है एवं भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करता हुआ दिखाई दे रहा है। दूसरा, भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, इस देश में नागरिकों को अपने विचार रखने की आजादी है अतः विश्व के अन्य देश भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं और भारत में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। अभी हाल ही में अन्य देशों में निवासरत भारत के मूल नागरिकों ने भारत में 13,600 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भारतीय बैंकों में जमा की है। यह भारत की शक्ति एवं मजबूती को दर्शाता है। तीसरा, भारत में आर्थिक सुधार कार्यक्रम लगातार चल रहे है। हाल ही में, वस्तु एवं सेवा कर की दरों में कमी की गई थी जिसके चलते भारतीय नागरिकों की जेब में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि पहुंची है, इससे भारतीय नागरिकों की खर्च करने की क्षमता में वृद्धि हुई है। चौथा, भारत में डिजिटल आधारभूत संरचना को मजबूती प्रदान की गई है। भारतीय यूपीआई की मांग अब विश्व के अन्य देशों द्वारा भी की जा रही है। जनधन योजना के अंतर्गत देश के करोड़ों नागरिकों के बैंक खाते खोले गए हैं, जिन्हें आधार से जोड़ दिया गया है और स्मार्ट मोबाइल आज जैसे जेब में बैंक का कार्य करता हुआ दिखाई दे रहा है। डिरेक्ट बेनिफिट ट्रान्स्फर योजना को भी बहुत सरल बना दिया गया है। इससे देश में भ्रष्टाचार में कमी आई है। पांचवां, भारत में हाल ही के समय में वित्तीय क्षेत्र में मजबूती आई है। मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारतीय बैंकों में सकल गैर निष्पादनकारी आस्तियां 1.8 प्रतिशत से भी नीचे आ गई हैं। यह अपने आप में एक रिकार्ड है। छठा, सरकारी खर्चों के उपयोग में अब सुधार दृष्टिगोचर है और इसकी गुणवत्ता भी सुधरी है। केंद्र सरकार के पूंजीगत खर्च पिछले 5 वर्षों में तीन गुना हो गए हैं। इससे भारत में रेल, रोड एवं पोर्ट की आधारभूत संरचना विकसित हुई है, जो विदेशी निवेशकों को भी भारत में अपना निवेश बढ़ाने के लिए आकर्षित कर रही है। सांतवा, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 68,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए हैं, जो कि भारत के लिए बहुत अच्छा सुरक्षा कवच बन गया है। आंठवां, भारत का वित्तीय घाटा वित्तीय वर्ष 2020-21 में 9.2 प्रतिशत था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में घटकर 4.4 प्रतिशत के स्तर पर नीचे आ गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था में उक्त 8 मानकों पर हुए सुधार के चलते जापान क्रेडिट रेटिंग एजेन्सी ने भारत के सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग में बढ़ौतरी की है।
विश्व की क्रेडिट रेटिंग एजेन्सीयों द्वारा विभिन्न देशों की आर्थिक एवं वित्तीय स्थिति के आधार पर इन देशों की क्रेडिट रेटिंग निर्धारित की जाती है। इन देशों द्वारा अथवा इन देशों के बैकों द्वारा एवं इन देशों की कम्पनियों द्वारा वैश्विक बाजार से उधार ली जाने वाली राशि पर ब्याज की दर इस क्रेडिट रेटिंग के आधार पर निर्धारित होती है। यदि क्रेडिट रेटिंग उच्च स्तर की रहती है तो उस देश द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ली जाने वाली ऋणराशि पर ब्याज की दर कम निर्धारित होती है। दूसरे, इससे उस देश में विदेशी निवेश आकर्षित होता है, क्योंकि इन देशों में किया गया विदेशी निवेश सुरक्षित माना जाता है। विभिन्न क्रेडिट रेटिंग एजेन्सी द्वारा निम्न प्रकार की क्रेडिट रेटिंग प्रदान की जाती है। AAA – यह प्राइम क्रेडिट रेटिंग मानी जाती है एवं यह देश निवेश की दृष्टि से इन्वेस्टमेंट ग्रेड का है। AA – क्रेडिट रेटिंग भी हाई ग्रेड की मानी जाती है। A – क्रेडिट रेटिंग अपर मीडीयम ग्रेड की मानी जाती है। BBB – क्रेडिट रेटिंग लोअर मीडीयम ग्रेड को दर्शाती है। BB – क्रेडिट रेटिंग नोन-इन्वेस्टमेंट ग्रेड एवं स्पेक्युलेटिव की श्रेणी में गिनी जाती है। B – क्रेडिट रेटिंग हाइली स्पेक्युलटिव श्रेणी में आती है एवं C – क्रेडिट रेटिंग अधिकतम रिस्क की श्रेणी में गिनी जाती है। भारत की क्रेडिट रेटिंग BBB+ ग्रेड में मानी जा रही थी जो अब सुधरकर A- कर दिया गया है।
पश्चिमी देशों की क्रेडिट रेटिंग एजेन्सीयों ने भारत की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग में पिछले कई वर्षों से बदलाव ही नहीं किया है जबकि भारत ने इस दौरान विशेष रूप से आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र में अतुलनीय सुधार करते हुए विकास दर को बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है। फिच नामक क्रेडिट रेटिंग एजेन्सी ने भारत की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग को अगस्त 2006 के बाद से परिवर्तित ही नहीं किया है, जो BBB- के स्तर पर लगातार बनी हुई है। इसी प्रकार, स्टैंडर्ड एंड पूअर नामक क्रेडिट रेटिंग एजेन्सी द्वारा 18 वर्ष पश्चात भारत की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग को 27 अगस्त 2026 को अपग्रेड करते हुए इसे BBB के स्तर पर ले आया गया है। एक अन्य क्रेडिट रेटिंग एजेन्सी मूडी ने जून 2020 के पश्चात भारत की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग में कोई परिवर्तन नहीं किया है और भारत को Baa3 की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग दी हुई है। उक्त एजेन्सीयां भारत की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग को उचित तरीके से नहीं दर्शाती हैं। जबकि, भारत के आर्थिक संकेतक बहुत मजबूत बने हुए हैं।
हाल ही में, विश्व के चार प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने भारत के आर्थिक विकास के संदर्भ में विशेष रिपोर्ट जारी की है। जिसमें भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना की गई है। जेफ्रीज नामक वित्तीय संस्थान की रिपोर्ट कहती है कि मोबाइल फोन, स्टील, सीमेंट, सोलर पैनल एवं ट्रक के निर्माण के क्षेत्र में भारत आज दुनिया में दूसरे स्थान पर आ गया है। वर्ष 2014 में स्पेस के क्षेत्र में भारत में केवल एक स्टार्टअप था आज भारत में इस क्षेत्र में 400 से अधिक स्टार्टअप कार्य कर रहे हैं। चिप निर्माण में 12 प्रोजेक्ट पर भारत में काम हो रहा है एवं 2,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश इस क्षेत्र में हो रहा है। साथ ही, 3 विनिर्माण इकाईयों में उत्पादन भी प्रारम्भ हो गया है। जेफ्रीज ने इस रिपोर्ट को नाम दिया है “इंडिया न्यू इंडस्ट्रीयल रेवोल्यूशन”।
दूसरी रिपोर्ट आई है बैंक ओफ अमेरिका से, जो कहती है कि भारत में बहुत कुछ बदल रहा है। पिछले 24 माह में भारत में 18 सुधार कार्यक्रम लागू हुए हैं। वस्तु एवं सेवा कर के ढांचे में 5 के स्थान पर मुख्यतः अब 2 दरें लागू कर दी गई हैं एवं इसे बहुत सरल बना दिया गया है। 12 लाख रुपए की कमाई तक, आय कर शून्य कर दिया गया है। नए लेबर कोड्ज भी लागू कर दिए गए हैं एवं सोशल सिक्यरिटी का दायरा भी बढ़ा दिया गया है।
तीसरी रिपोर्ट आई है (BERNSTEIN) बॉर्नस्टीन नामक संस्थान से, जो कहती है कि भारत के विकास में कुछ हिस्सा सरकारी सहयोग से आ रहा है। केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पूंजीगत खर्चों में भारी वृद्धि की है। जून 2026 तिमाही में भारत की 200 सबसे बड़ी कम्पनियों की आय 12 प्रतिशत बढ़ी है। वस्तु एवं सेवा कर की दरों में कमी करने से नागरिकों की जेब में करीब 20,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि पहुंची है। भारत के गांवों में कमजोर मानसून के बावजूद उत्पादों की मांग मजबूत बनी हुई है।
चौथी रिपोर्ट आई है मोर्गन सटेनली नामक संस्थान से, इसके अनुसार, पिछले वर्ष विश्व के 24 स्टॉक मार्केट में से भारत का मार्केट, रिटर्न देने के मामले में 23वें स्थान पर रहा है। यह कड़वा सच है। परंतु, ऊपर जाने के रास्ता लम्बा है पर यहीं से निकलता है। अभी भारत का सेन्सेक्स 76000 के आसपास हैं, जो जून 27 तक बढ़कर परिस्थिति अनुसार, 89000 अथवा 100000 के स्तर तक पहुंच सकता है। भारतीय कम्पनियों के शेयर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुछ सस्ते हो गए है। चूंकि भारतीय स्टॉक मार्केट ने पिछले वर्ष अच्छे रिटर्न नहीं दिए हैं अतः मार्केट इस वर्ष इस गलती को सुधारने को तैयार हो रहा है। भारत में निवेश, नागरिकों की बचत से आ रहा है, प्रति माह करोड़ों नागरिक SIP के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए का निवेश देश के पूंजी बाजार में कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में आज देशी निवेशकों का निवेश विदेशी निवेशकों के निवेश की तुलना में अधिक हो गया है। जब विदेशी निवेशक वापिस भारतीय शेयर बाजार में लौटेंगे तो उन्हें आज की तुलना में महंगे शेयर खरीदने होंगे। अर्थात, भारतीय शेयर बाजार गिरा जरूर है, परंतु इसीलिए आगे का रास्ता लम्बा हो सकता है लेकिन जाना उसे ऊपर की ओर ही है।
वैश्विक स्तर की उक्त चार बैंकिंग संस्थानों की रिपोर्ट स्पष्ट कहती हैं कि भारत विकास के राह पर बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है एवं भारत के आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र में लगातार सुधार कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। अब पश्चिमी देशों की क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा भी भारत की सार्वभौम क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया जाएगा, ऐसी आशा की जानी चाहिए।
