दिग्विजय बनें, थरूर बनें या फिर गहलौत बन जाते, क्या फर्क पड़ता है ?
लेखक – अवधेश प्रताप सिंह, कानपुर (उत्तर प्रदेश) जब प्रत्याशी भी सोनिया से पूछकर बनना है , जब पीएम पद…
खबर और साहित्य
विचारों पर मंथन , क्या सही क्या गलत ? कौन सा दृष्टिकोण सही कौन सा गलत ? इन्ही विषयों पर मंथन |
लेखक – अवधेश प्रताप सिंह, कानपुर (उत्तर प्रदेश) जब प्रत्याशी भी सोनिया से पूछकर बनना है , जब पीएम पद…
प्रयावरण संरक्षण के लिए ही बना होगा न, अगर नेशनल पार्क बनाया गया है तो? अमेरिका का येलोस्टोन नेशनल पार्क…
करीब-करीब 1950 के लगभग जब गीता प्रेस ने रामचरितमानस छापा, तो उस संस्करण की विशेष बात ये थी कि उसमें…
कभी कभी चीजें जो दिखती है वो होती नहीं है और असल में जो होती है वहाँ तक हमारी सोच…
नेहरु ने नहीं बनवाया मियां, ये किस्सा कुछ और है! ये प्राचीन काल, मतलब करीब सवा सौ साल पहले की…
भारत मे अक्सर आपने सुना होगा कि फलां होटल मे रेड पड़ी और बहुत सारे लोग देह व्यापार मे पकड़े…
जो एक पक्ष के लिए आतंकी है, वो दूसरे पक्ष का क्रन्तिकारी भी हो सकता है! ये अजीब सा जुमला…
“विश्वास” पर कभी एक कहानी सी पढ़ी थी। उसमें किसी गाँव में बारिश नहीं हो रही थी तो ग्रामीणों ने…
किसान बिल अगर लागू हो गया होता तब क्या होता ? भारत सरकार ने इमिडिएट इफ़ेक्ट से गेहू के निर्यात…
माना की माना है खुदा हमने तुमको खुद ही खुद को खुदा ना समझो
नूपुर को फटकारने वाले जस्टिस पारदीवाला बोले- ‘जजों पर निजी हमले बंद हों, सोशल मीडिया पर लगे लगाम’ जस्टिस पारदीवाला…