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पटना.  कृषि कानून के खिलाफ देश भर में आंदोलन जारी है. जन अधिकार पार्टी ने पूरे बिहार मे आज इस कानून के खिलाफ काला दिवस मनाया।  जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय महासचिव और संगठन प्रभारी भाई दिनेश के नेतृत्व में इस काले कानून के खिलाफ काला दिवस मनाया गया. भाई दिनेश ने कहा कि  केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कानूनों से पहले मंडियों पर पूंजीपतियों का कब्ज़ा होगा. फिर धीरे-धीरे किसानों से उनकी जमीन भी छीन ली जाएगी.  आज छः माह से किसान सड़क पर बैठे हैं। हमारी पार्टी संयुक्त किसान संघर्ष समिति के हरेक फैसले के साथ हैं
   कृषि कानून के खिलाफ आयोजित काला दिवस को सम्बोधित करते हुए जाप के राष्ट्रीय महासचिव प्रेमचन्द सिंह ने बताया कि  केंद्र सरकार किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है देश के अन्नदाताओं के साथ वर्तमान सरकार जो दु‌र्व्यवहार कर रही है यह कहीं से उचित नहीं है ।  किसानों की मांगे पूरी नहीं हो जाती, तबतक किसान विरोधी सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।   केंद्र सरकार ने इस काला कानून को लाकर किसानों को मारने का काम किया है।
  जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजेश पप्पू ने बताया कि  केंद्र सरकार ने देश को पूजिपतियों के आगे गिरवी रख दिया है देश को आर्थिक गुलामी के तरफ धकेलने की कोशिश की जा रही है लगातार ऐसे कानून लाकर भारत को कमजोर किया जा रहा है हमारी पार्टी हर मुद्दे पर जनता के बीच रहती है हम किसानों के सभी मांगों का समर्थन मरते दम करते रहेंगे । पार्टी कार्यालय में आयोजित इस धरना में राज्य प्रवक्ता बरुण जी, श्यामदेव सिंह चौहान, शशांक मोनू, निशांत कुमार, पुरुषोत्तम कुमार, नीरज कमांडो, नीतीश सिंह, सन्नी यादव, चन्दन कुमार, विनय यादव, आशीष, अमर राज,  विकास सहित कई लोंगों ने  भाग लिया।

By anandkumar

आनंद ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की है और मास्टर स्तर पर मार्केटिंग और मीडिया मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। उन्होंने बाजार और सामाजिक अनुसंधान में एक दशक से अधिक समय तक काम किया। दोनों काम के दायित्वों के कारण और व्यक्तिगत हित के रूप में उन्होंने पूरे भारत में यात्रा की। वर्तमान में, वह भारत के 500+ जिलों में अपना टैली रखता है। पिछले कुछ वर्षों से, वह पटना, बिहार में स्थित है, और इन दिनों संस्कृत में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहें है। एक सामग्री लेखक के रूप में, उनके पास OpIndia, IChowk, और कई अन्य वेबसाइटों और ब्लॉगों पर कई लेख हैं। भगवद् गीता पर उनकी पहली पुस्तक "गीतायन" अमेज़न पर लॉन्च होने के पांच दिनों के भीतर स्टॉक से बाहर हो गई।

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