zubair ko mili zamanat
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ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को बड़ी राहत मिली है। उन्हें कथित ट्वीट मामले में जमानत मिली है।

Highlights
  1. पटियाला हाउस कोर्ट की सत्र अदालत ने जुबैर को सशर्त जमानत दी
  2. जमानत देने के लिए कोर्ट ने भरवाया 50 हजार का बॉन्ड
  3. साथ ही बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ने का आदेश दिया

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को बड़ी राहत मिली है। पटियाला हाउस कोर्ट की सत्र अदालत ने जुबैर को जमानत दे दी है। यह जमानत उन्हें कथित ट्वीट मामले में मिली है। जुबैर को जिस मामले में जमानत मिली है, वह केस उनके खिलाफ दिल्ली में दर्ज हुआ था। हालांकि, जमानत मिलने के बाद भी जुबैर अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। जुबैर कई अन्य मामलों में भी आरोपी हैं। जुबैर को जमानत का दिल्ली पुलिस ने विरोध किया था।

नई दिल्ली: अल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को जमानत मिल गई है। शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट की सत्र अदालत ने कथित ट्वीट मामले में मोहम्मद जुबैर को जमानत दे दी है। जुबैर पर अपने ट्वीट के जरिए धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने गुरुवार को इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

फेक्ट चेकर वेबसाइट के को-फाउंडर को कोर्ट ने सशर्त जमानत दी है। कोर्ट ने जमानत के साथ 50,000 का बांड और न्यायालय की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ना का आदेश भी दिया है। हालांकि मोहम्मद जुबैर को यह जमानत दिल्ली में दर्ज मामले में के लिए मिली है। ऐसे में उन्हें अभी यूपी पुलिस के कस्टडी में ही रहना पड़ेगा। क्योंकि जुबैर के खिलाफ यूपी में अलग-अलग जगहों पर 6 मामले दर्ज हैं। बता दें कि यूपी के हाथरस की एक अदालत ने गुरुवार को जुबैर को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

 

बता दें कि मोहम्मद जुबै की जमानत याचिका पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में गुरुवार बहस पूरी हो गई थी. कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज कोर्ट ने इस याचिका पर फैसला सुना दिया है. कोर्ट में मोहम्मद जुबैर की तरफ से उनकी वकील वृंदा ग्रोवर और दिल्ली पुलिस की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अतुल श्रीवास्तव ने पक्ष रखा था.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस से उस ट्वीट की तारीख पूछी थी जिसपर मामला दर्ज किया गया है. एसपीपी अतुल श्रीवास्तव ने ट्वीट की तारीख के बारे में कोर्ट को जानकारी दी थी. एसपीपी का कहना था कि ट्वीट 2014 से पहले और 2014 के बाद के हैं. यह विशेष रूप से स्पष्ट है कि यह जानबूझकर किया गया था. कोर्ट ने पूछा इसका इरादा क्या था.

एसपीपी ने कहा था कि उद्देश्य यह है कि वे यह कहना चाहते हैं कि 2014 में, सरकार का परिवर्तन हुआ था. दूसरे पक्ष के लोगों को उकसाने और गलत इच्छा पैदा करने के लिए यह ट्वीट किया गया. एसपीपी ने कहा कि  हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं और आपने ट्वीट में हनीमून से तुलना की है.

वहीं उन्होंने कहा था कि जुबेर को 2022 में विदेशी फंड भी मिला था. वह भी ईरान, सऊदी, पाकिस्तान आदि देशों से. वहीं इस पर जुबैर की वकील ग्रोवर ने कहा था कि मैं साबित कर दूंगी और यह जानकारी कोर्ट को बताऊंगी  कि कोई विदेशी योगदान नहीं है,  मैंने किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है.

 

 

 

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