उन्होंने कहा कि भारत के पास 2030 तक 90 गीगावॉट सौर उपकरण निर्माण क्षमता होगी, जो वर्तमान में 20 गीगावॉट है।
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 15-20 गीगावॉट सौर उपकरण निर्माण क्षमता निर्माणाधीन है और भारत में 40 गीगावॉट ऐसी सुविधाएं होंगी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना- II (पीएलआई-द्वितीय)।
मंत्री ने उद्योग जगत से उच्च दक्षता वाले सौर उपकरणों के निर्माण में बदलाव करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही 170 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा (बड़े हाइड्रो सहित) है, जबकि अन्य 80 गीगावॉट निर्माणाधीन है।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा हासिल करने की योजना बनाई है।
मंत्री ने कहा, “हम केवल 65 प्रतिशत (2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा से) तक नहीं पहुंचेंगे, हमारे पास इससे अधिक (65 प्रतिशत क्षमता) होगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग ने 2.5 करोड़ टन हरित हाइड्रोजन क्षमता के लिए रुचि दिखाई है।
उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन निर्माण क्षमता 35-40 मिलियन टन हो सकती है।
