समझाया: केंद्रीय बजट क्या है, इसके संवैधानिक प्रावधान


बजट एक वार्षिक वित्तीय विवरण है जो आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के प्रस्तावित व्यय और राजस्व का विवरण देता है, जो 1 अप्रैल से शुरू होता है और अगले वर्ष 31 मार्च को समाप्त होता है।

बजट भारत के वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाता है। बजट एक व्यापक दस्तावेज है जो अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की आर्थिक और राजकोषीय नीतियों की रूपरेखा तैयार करता है।

बजट से संबंधित संवैधानिक प्रावधान क्या हैं?

भारत का संविधान भारत में बजट से संबंधित कुछ आवश्यकताओं को पूरा करता है। इसमें शामिल है:

1. संविधान के अनुच्छेद 112 में भारत के राष्ट्रपति को वार्षिक वित्तीय विवरण (यानी बजट) को फरवरी के अंतिम दिन या उसके बाद पहले कार्य दिवस पर संसद के समक्ष रखने की आवश्यकता होती है।

2. संविधान के अनुच्छेद 114 में सरकार को भारत की संचित निधि की प्राप्तियों और व्यय का एक अलग खाता प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, जिसमें केंद्र सरकार के राजस्व और कुछ अन्य निधियों के साथ-साथ सरकार द्वारा प्राप्त सभी धन शामिल हैं। ऋण।

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3. संविधान के अनुच्छेद 266 में सरकार को करों और अन्य राजस्वों सहित प्राप्त सभी राजस्वों को भारत की संचित निधि में जमा करने की आवश्यकता है, जब तक कि अन्यथा कानून द्वारा प्रदान न किया गया हो।

4. संविधान के अनुच्छेद 266(2) के अनुसार सरकार को संसद द्वारा पारित कानून द्वारा अधिकृत किए जाने के बाद ही भारत की संचित निधि से पैसा निकालना होगा। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार संसद की स्वीकृति के बिना संचित निधि से पैसा नहीं निकाल सकती है।

5. संविधान के अनुच्छेद 270 में सरकार को प्रत्येक राज्य सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है, जिसे राज्य का बजट कहा जाता है।

6.संविधान के अनुच्छेद 272 में सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुछ निर्दिष्ट करों और शुल्कों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है।

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केंद्रीय बजट में निम्नलिखित प्रमुख घटक शामिल हैं:

राजस्व बजट: यह खंड कर, गैर-कर राजस्व और पूंजीगत प्राप्तियों जैसे विभिन्न स्रोतों से सरकार के अनुमानित राजस्व का विवरण देता है। यह दिखाता है कि सरकार करों, गैर-कर राजस्व और अन्य स्रोतों से कितना पैसा कमाने की योजना बना रही है।

पूंजीगत बजट: यह खंड विभिन्न पूंजी परियोजनाओं जैसे बुनियादी ढांचे के विकास, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में पूंजी निवेश और अन्य दीर्घकालिक निवेशों पर सरकार के प्रस्तावित खर्च का विवरण देता है। इससे पता चलता है कि सरकार नई सड़कों, पुलों और हवाई अड्डों के निर्माण जैसी लंबी अवधि की परियोजनाओं पर कितना पैसा खर्च करने की योजना बना रही है।

योजना और गैर-योजनागत व्यय: बजट भी अपने व्यय को दो भागों में विभाजित करता है, योजनागत और गैर-योजनागत व्यय। योजनागत व्यय में विशिष्ट सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित धन शामिल होता है, जबकि गैर-योजनागत व्यय में वेतन, पेंशन और प्रशासनिक लागत जैसे नियमित व्यय शामिल होते हैं।

राजकोषीय घाटा: बजट में राजकोषीय घाटे का अनुमान भी शामिल होता है, जो सरकार के कुल व्यय और उसके कुल राजस्व के बीच का अंतर होता है। सरकार का लक्ष्य वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए राजकोषीय घाटे को कम करना है।

कर प्रस्ताव: बजट में कर कानूनों और कर दरों में बदलाव के प्रस्ताव भी शामिल हैं, जिनका व्यवसायों और व्यक्तियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

बजट का महत्व क्या है?

भारतीय बजट व्यवसायों, निवेशकों और आम जनता द्वारा बारीकी से देखा जाता है क्योंकि यह सरकार की आर्थिक नीतियों और प्राथमिकताओं में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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