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23 जिलों में 650 स्कूलों और 608 मदरसों के किशोर-किशोरियों और समुदाय के सदस्यों को वित्तीय साक्षरता का मिलेगा लाभ

पटना, 24 अगस्त: बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपीसी) और यूनिसेफ द्वारा संयुक्त रूप से 22-24 अगस्त तक पटना में ‘किशोरियों के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम’ विषय पर स्टेट मास्टर ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया. कोलकाता स्थित एनजीओ, विक्रमशिला एजुकेशन सोसाइटी के रिसोर्स पर्सन्स द्वारा दो बैचों में 65 सेकेंडरी/हायर सेकेंडरी स्तर के सरकारी स्कूल शिक्षकों, 30 मदरसा शिक्षकों और सहयोगी सामाजिक संगठनों (प्रथम, नारी गुंजन, सेव द चिल्ड्रन, मशाल और ऐक्शन एड) के 24 प्रतिनिधियों सहित कुल 119 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया।

प्रतिभागियों को बजट, खाता खोलने, ऋण के प्रकार, सरकारी योजनाओं, इंटरनेट लेनदेन, बैंकिंग लेनदेन से संबंधित सुरक्षा उपाय, एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग का सुरक्षित उपयोग, डिजिटल भुगतान समेत करियर योजना पर प्रशिक्षित किया गया।

रिसोर्स पर्सन्स द्वारा 12 मॉड्यूल्स की प्रस्तुति और बैंकिंग सेवा से जुड़े आयामों पर विस्तृत चर्चा के अलावा विभिन्न समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए यूनिसेफ बिहार की शिक्षा विशेषज्ञ, पुष्पा जोशी ने कहा कि किशोर-किशोरियों का सशक्तिकरण बिहार सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है।

आम तौर पर, युवाओं को अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप अवसरों को खोजने में काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है।

कोविड महामारी के दौरान शिक्षा में व्यवधान, स्कूल ड्रॉपआउट दर और कम उम्र में विवाह के मामलों में वृद्धि ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

इस संदर्भ में वित्तीय साक्षरता एक महत्वपूर्ण विषय है जिसमें किशोर-किशोरियों का कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को वित्तीय साक्षरता के विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि यहाँ प्रशिक्षित स्टेट मास्टर ट्रेनर्स (एसएमटी) 13 बीईपीसी समर्थित अल्पसंख्यक जिलों में 650 सेकेंडरी/सीनियर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों और मदरसा बोर्ड द्वारा चयनित 2 जिलों में 608 मदरसा शिक्षक को आगे प्रशिक्षित करेंगे। प्रत्येक एसएमटी द्वारा 650 में से हर स्कूल में 40 लड़कियों को 20 घंटे की अनिवार्य पाठ्यक्रम अवधि के माध्यम से वित्तीय साक्षरता प्रदान की जाएगी।

इस प्रकार, 9वीं से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली लगभग 26,000 बालिकाएं लाभान्वित होंगी।

इसी तरह, 608 मदरसों में से प्रत्येक में 40 लड़के-लड़कियों यानी कुल 24,000 बच्चों को वित्तीय शिक्षा का फ़ायदा मिलेगा।

जहाँ स्कूली छात्राओं को स्मार्ट क्लास के अलावा चेतना सत्र एवं स्कूल प्रशासन द्वारा निर्धारित विशेष दिनों में वित्तीय साक्षरता के गुरु सिखाए जाएंगे,वहीं मदरसों के मामले में इस उद्देश्य के लिए अंजुमन कार्यक्रम का इस्तेमाल किया जाएगा।

बीईपीसी के राज्य कार्यक्रम अधिकारी कुमार अरविंद सिन्हा ने इस पहल को पूरी तरह से समर्थन देने का आश्वासन देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम लगातार चलाया जाएगा।

हम इसे मौजूदा 13 जिलों से बढ़ाकर सभी 38 जिलों में शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

साथ ही, बीईपीसी, यूनिसेफ, मदरसा बोर्ड और सीएसओ भागीदारों के माध्यम से संयुक्त रूप से निगरानी करने का भी प्रावधान है।

निगरानी के उद्देश्य से हमने कुछ संकेतक तैयार किए हैं जिनमें प्रत्येक स्कूल में सभी 40 लड़कियों द्वारा खाता खोलना, उनके द्वारा एटीएम सेवा का उपयोग करने में सक्षम होना, उनके परिवारों को आपात स्थिति के मामले में साहूकारों के पास जाने के लिए मजबूर नहीं होना बल्कि आवश्यकता पड़ने पर लड़कियों की शिक्षा और कैरियर निर्माण के लिए बैंक से ऋण लेना आदि शामिल हैं।

उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस पहल से अल्पसंख्यक और महादलित समुदायों की लड़कियों के वित्तीय समावेशन का मार्ग प्रशस्त होगा एवं उनके ज़रिए उनके परिवारों और समुदाय को भी जागरूक किया जा सकेगा।

वित्तीय साक्षरता से किशोर लड़कियाँ निश्चित रूप से सशक्त बनेंगी और उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने, बेहतर विकल्प चुनने और करियर निर्माण में भी मदद मिलेगी।

यूनिसेफ बिहार के शिक्षा अधिकारी बसंत कुमार सिन्हा ने स्कूल स्तर पर ट्रेनिंग के प्रारूप के संबंध में कहा कि लड़कियों को शिक्षित करने के लिए

स्मार्ट कक्षाओं में 5-10 मिनट के 15 वीडियो वाले कुल 12 ऑनलाइन मॉड्यूल दिखाने के साथ आवश्यकतानुसार ऑफ़लाइन मोड यानी मैनुअल माड्यूल का भी उपयोग किया जाएगा।

साथ ही, बेहतर समझ सुनिश्चित करने व बैंकिंग प्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के लिए लड़कियों को एक्सपोजर विजिट की सुविधा प्रदान की जाएगी।

लड़कियों को बैंकों और एटीएम का दौरा करवाने के साथ-साथ रोल प्ले भी करवाया जाएगा।

जीवन कौशल लड़कियों को निरंतर स्कूली शिक्षा की चुनौतियों और बाधाओं का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने, बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने और प्रभावी करियर योजना बनाने में मदद करने के अलावा छात्रवृत्ति योजनाओं का बेहतर लाभ उठाने में भी सक्षम बनाएगा।

बीईपीसी समर्थित 13 अल्पसंख्यक जिलों (अररिया, बांका, भागलपुर, दरभंगा, गोपालगंज, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूरेना, सीतामढ़ी, सीवान और सुपौल), मदरसा बोर्ड द्वारा अनुशंसित 2 जिलों (पूर्णिया और किशनगंज) और उड़ान कार्यक्रम के तहत सहयोगी सामजिक संगठनों की मदद से 22 जिलों को इस कार्यक्रम के तहत कवर किया जाना है।

कुल मिलाकर, इस पहल के तहत 23 जिलों में किशोर, किशोरियों और समुदाय के लोगों के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम चलाया जाना है।

कार्यक्रम के दौरान बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के सचिव, सईद अंसारी, बीईपीसी के स्टेट रिसोर्स पर्सन, भारत भूषण, यूनिसेफ बिहार के वरिष्ठ सलाहकार, एस.ए. मोईन एवं राज्य सलाहकार, धर्मवीर कुमार सिंह और मुजतबा हुसैन उपस्थित रहे।

By anandkumar

आनंद ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की है और मास्टर स्तर पर मार्केटिंग और मीडिया मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। उन्होंने बाजार और सामाजिक अनुसंधान में एक दशक से अधिक समय तक काम किया। दोनों काम के दायित्वों के कारण और व्यक्तिगत रूचि के लिए भी, उन्होंने पूरे भारत में यात्राएं की हैं। वर्तमान में, वह भारत के 500+ में घूमने, अथवा काम के सिलसिले में जा चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों से, वह पटना, बिहार में स्थित है, और इन दिनों संस्कृत विषय से स्नातक (शास्त्री) की पढ़ाई पूरी कर रहें है। एक सामग्री लेखक के रूप में, उनके पास OpIndia, IChowk, और कई अन्य वेबसाइटों और ब्लॉगों पर कई लेख हैं। भगवद् गीता पर उनकी पहली पुस्तक "गीतायन" अमेज़न पर बेस्ट सेलर रह चुकी है।

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