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पटना, 04 जून सामाजिक संगठन दीदीजी फाउंडेशन और ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) ग्रो ग्रीन अभियान के तहत विश्व पर्यावरण दिवस मनाया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर 05 जून की पूर्व संध्या पर राजधानी पटना के कुरथौल स्थित फुलझड़ी गार्डन में दीदजी फाउंडेशन और (जीकेसी) के गो ग्रीन अभियान के तहत विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। गो ग्रीन अभियान के तहत 100 से अधिक पौधे लगाए गये।

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इस अवसर पर दीदीजी फाउंडेशन की संथापिका और जीकेसी बिहार की प्रदेश अध्यक्ष डा. नम्रता आनंद ने कहा, हर साल दुनियाभर में 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। बढ़ते प्रदूषण और प्रकृति को हो रहे नुकसान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा, विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना है।हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अपने पर्यावरण की रक्षा करें और पेड़- पौधे काटने से बचें। विकास और आधुनिकता की दौड़ में हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं और इस तरह हम प्रकृति से दूर जा रहे हैं।पेड़ों के कटने की संख्या बढ़ती जा रही है। हरे-भरे खेत खाली मैदानों में बदल दिए गए हैं। हवा इतनी दूषित हो गई है कि शहरों में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।प्रकृति का एक आवरण हमारे चारों ओर हैं, वह हमें हवा,पानी,भोजन सब कुछ देता है, लेकिन मनुष्य उस आवरण को ही नष्ट कर रहा है।निजी स्वार्थ को लेकर जंगलों की अंधाधुंध कटाई से ओजोन परत पतली हो रही है और मानसून का अपना हिसाब किताब गड़बड़ हो रहा है। ऐसे में हमें सावधान होने की जरूरत है। पेड़ पौधे वंदनीय हैं, पृथ्वी को हरा-भरा रखने के लिए पेड़ पौधों का होना जरूरी है।
दीदी जी फाउंडेशन के संरक्षक संदीप चौधरी ने बताया कि पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बहुत आवश्यक है। जब तक हम पौधारोपण नहीं करेंगे तब तक तब तक प्रकृति से कम हो गई ऑक्सीजन वापस नहीं आएगी। इस अवसर पर जीकेसी कला संस्कृति प्रकोष्ठ बिहार के अध्यक्ष दिवाकर कुमार वर्मा, प्रदेश प्रवक्ता मुकेश महान, समाजसेवी मिथिलेश सिंह, प्रियंका अमित, बिट्टू, लव कुश, देवी, दीपक राखी, लवली, मोहित, स्वाति, रणधीर रोशन मौजूद थे.

By anandkumar

आनंद ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की है और मास्टर स्तर पर मार्केटिंग और मीडिया मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। उन्होंने बाजार और सामाजिक अनुसंधान में एक दशक से अधिक समय तक काम किया। दोनों काम के दायित्वों के कारण और व्यक्तिगत हित के रूप में उन्होंने पूरे भारत में यात्रा की। वर्तमान में, वह भारत के 500+ जिलों में अपना टैली रखता है। पिछले कुछ वर्षों से, वह पटना, बिहार में स्थित है, और इन दिनों संस्कृत में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहें है। एक सामग्री लेखक के रूप में, उनके पास OpIndia, IChowk, और कई अन्य वेबसाइटों और ब्लॉगों पर कई लेख हैं। भगवद् गीता पर उनकी पहली पुस्तक "गीतायन" अमेज़न पर लॉन्च होने के पांच दिनों के भीतर स्टॉक से बाहर हो गई।

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