हम सब कलाकार हैं धरती पर | Poetry By Ankit Paurush | The Ankit Paurush Show
Hum Sab Kalakaar Hain | Poetry By Ankit Paurush हम सब कलाकार हैं इस धरती पर, अनेकों चरित्र निभाने आए…
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Hum Sab Kalakaar Hain | Poetry By Ankit Paurush हम सब कलाकार हैं इस धरती पर, अनेकों चरित्र निभाने आए…
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भारत की राजनैतिक व्यवस्था से अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था में क्या बदलाव होने वाले हैं, इनका अनुमान लगाना हो तो…
Kuch Sapna Sone Nahin Detey | Poetry By Ankit Paurush कुछ सपने सोने नहीं देते, लगता है सपने हैं या…
प्रतीकों के माध्यम से जो बातें कही जाती हैं, उनके लिए पौराणिक कथाएँ अच्छा उदाहरण होती हैं। जैसे कि एक…
Yeh Zaruri Nahin | Poetry By Ankit Paurush This poem highlights about ” It’s not necessary to get all the…
घटना कोई भी हो, टीका-टिप्पणी तो जरूरी है न? भारत में ही नहीं, विश्व भर में ये परंपरा ही है…
हम बड़े क्या हो गए, भेद भाव मैं खो गए, जब बचपन में रहा करते थे, कभी ऐसा न किया…
इंसान पड़ा ज़मीन पर, लोग समझे मर गया, अब तक था सफर में, अब वो अपने घर गया । जीने…
हाँ हक़ीक़त है ये , मज़ाक जैसी लगती है, भीड़ में भी , तन्हाईयों की महफिल सजती है, कैसी है…