वो खुद को तुमसा मानते कब थे?
यह लेख मूलतः मराठी पत्रिका “सांस्कृतिक वार्तापत्र” में प्रकाशित हुआ था ये सवाल हमें रहीमतुल्लाह एम. सयानी पर ले आता…
खबर और साहित्य
यह लेख मूलतः मराठी पत्रिका “सांस्कृतिक वार्तापत्र” में प्रकाशित हुआ था ये सवाल हमें रहीमतुल्लाह एम. सयानी पर ले आता…
लेखक – प्रहलाद सबनानी, सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक विश्व के कई देशों में मुद्रा स्फीति को नियंत्रित…
लेखक – प्रहलाद सबनानी, सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक अभी हाल ही में भारतीय मूल के राजनेता श्री…
प्रहलाद सबनानी सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक इस पृथ्वी पर रहने वाले मानवों की भलाई के लिए खाद्य…
घटना कोई भी हो, टीका-टिप्पणी तो जरूरी है न? भारत में ही नहीं, विश्व भर में ये परंपरा ही है…
लेखक – डॉ. दिनेश चन्द्र मिश्र गुजराती में एक कहावत है, “छतरी पलटी गयी, कागड़ी थई गई”। जिसका अर्थ होता…
लेखक – प्रह्लाद सबनानी, सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक कई अनुसंधान प्रतिवेदनों के माध्यम से अब यह सिद्ध…
दीपावली के नजदीक आते ही “कुछ मीठा हो जाये” वाला प्रचार कहीं न कहीं सुनाई दे जाता है। कभी कभी…
फिलोसोफी के प्रोफेसर अपनी कक्षा के सामने खड़े थे। छात्र-छात्राओं ने उन्हें देखा लेकिन रोज की तरह अपना लेक्चर शुरू…
अर्जुन कृष्ण प्रसंग:- कलयुग मे अराजकता क्या होता है ?
अर्जुन कृष्ण प्रसंग कलयुग मे ! अर्जुन :- अराजकता की स्थिती क्या होती है ? और ये कब बन जाता…