वैज्ञानिकों का कहना है कि यह धरती पर जीवित पाए जाने वाले बेहद दुर्लभ किस्म के जीवों में से है। इनका शरीर ऐसे पदार्थ से भरा रहता है जिसको प्रकाश पार करके निकल जाता है और ये आसानी से दिखाई नहीं देते हैं। साइंस जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में इसका जिक्र किया गया है। इसे ग्लास फ्रॉग नाम दिया गया है। वैज्ञानिक कहते हैं कि इनमें ऐसी क्षमता होती है कि जब कोई खतरा ये महसूस करते हैं तो अपने आपको पारदर्शी कर लेते हैं जिससे हमलावर इनको देख ही नहीं पाता है।
स्टडी में कहा गया है कि जब ये सोते हैं इनके रेड ब्लड सेल्स यानि कि लाल रक्त कोशिकाएं लिवर में इकट्ठा हो जाती हैं। ये वहां जाकर छिप जाती हैं जिससे इनके शरीर का बाकी द्रव्य पदार्थ पारदर्शी हो जाता है और शिकारी से ये बच जाते हैं। यानि कि जब ये आराम कर रहे होते हैं तो इनको देख पाना लगभग असंभव है। यहां पर इन मेंढकों के बारे में पता लगना एक और बड़ी खोज को जन्म दे सकता है, जिसके बाद वैज्ञानिक ये पता भी लगा सकते हैं कि खून का थक्का जमने से कैसे रोका जा सकता है, यानि कि घातक ब्लड क्लॉट को रोकना भी संभव हो सकता है।
वैसे जिंदा रहने के लिए ग्लास फ्रॉग भी हीमोग्लोबिन पर ही निर्भर करते हैं। यह खून में मौजूद ऐसा प्रोटीन होता है जो रेड ब्लड सेल्स में पाया जाता है। यह पूरे शरीर में ऑक्सीजन को लेकर जाता है। स्टडी से जुड़े जेसी डेलिया और कार्लोस तबोआदा इन मेंढ़कों के बारे में लगातार अध्य्यन करने में लगे हुए हैं। इन्होंने अपने ऑब्जर्वेशन के दौरान ये भी पाया है कि बहुत से मौकों पर इनमें लाल रंग दिखना बंद हो जाता है।
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