श्रीमद्भगवद्गीता — भगवानुवाच
श्लोक संख्या 15 | अध्याय 2 | श्लोक 23
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि आत्मा को न कोई शस्त्र काट सकता है, न अग्नि जला सकती है, न जल भिगो सकता है और न वायु सुखा सकती है।
पिछले श्लोक में श्रीकृष्ण ने शरीर बदलने की तुलना पुराने वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र धारण करने से की थी। अब वे बताते हैं कि शरीर बदलता है, लेकिन आत्मा भौतिक तत्वों से नष्ट नहीं होती।
शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु जैसे भौतिक तत्वों से प्रभावित होता है, लेकिन आत्मा इनसे परे है। इसलिए आत्मा की वास्तविक प्रकृति को समझना ही इस श्लोक का मूल संदेश है।
शरीर नश्वर है,
लेकिन आत्मा नश्वर नहीं।
भगवानुवाच Series में श्रीकृष्ण के इन वचनों को आधुनिक जीवन और आध्यात्मिक दृष्टि से समझने का प्रयास।
राधे-राधे। 🌿🙏🏻
✍️ शुभेन्दु प्रकाश
Platform: Aware News 24
Category/Column: धर्म का मर्म
Series: भगवानुवाच
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