चुनावी सर्वे: असम में फिर ‘केसरिया’ लहर, प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के संकेत
गुवाहाटी: आगामी असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर ‘पीपुल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा जारी किए गए ताज़ा सर्वे ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है । सर्वे के नतीजे बताते हैं कि असम की जनता एक बार फिर विकास और स्थिरता के पक्ष में मतदान करने का मन बना चुकी है, जिससे भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुँचती दिख रही है ।

बहुमत के आंकड़े से बहुत आगे एनडीए ट्रैकर पोल के अनुमानों के अनुसार, 126 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा अपने दम पर 69-74 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त कर सकती है । वहीं, सहयोगी दलों (AGP और BPF) को मिलाकर एनडीए का कुनबा 90 सीटों के जादुई आंकड़े को छूता नजर आ रहा है । सर्वे के मुताबिक, विपक्षी खेमे में बिखराव और एआईयूडीएफ (AIUDF) के घटते जनाधार का सीधा फायदा भाजपा नीत गठबंधन को मिलता दिख रहा है ।
गौरव गोगोई का बढ़ा कद, पर पार्टी पीछे मुख्यमंत्री की पसंद के मामले में वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (30%) और पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (28%) के बीच कड़ी टक्कर है । हालांकि, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 27% लोकप्रियता के साथ अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है । रिपोर्ट में यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि गोगोई की व्यक्तिगत छवि कांग्रेस पार्टी की तुलना में अधिक प्रभावशाली साबित हो रही है ।
जमीनी समीकरण: क्यों मजबूत है भाजपा? सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में हुआ परिसीमन भाजपा के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ है, जिसने उसके वोट बैंक को और अधिक संगठित कर दिया है । इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का एक बड़ा वर्ग और आदिवासी समुदायों (बोडो, चाय जनजाति आदि) का अटूट समर्थन भाजपा की राह को आसान बना रहा है ।
विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती कांग्रेस का वोट शेयर बढ़कर 37% होने के बावजूद वह इसे सीटों में बदलने में संघर्ष करती दिख रही है । एआईयूडीएफ के मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव तो कांग्रेस की तरफ बढ़ा है, लेकिन भाजपा की सांगठनिक शक्ति और मजबूत सामाजिक गठजोड़ के सामने यह अपर्याप्त नजर आ रहा है ।
यह विस्तृत सर्वे नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान राज्य के सभी 35 जिलों में किया गया था । मौजूदा रुझान स्पष्ट रूप से भाजपा की ‘हैट्रिक’ की ओर इशारा कर रहे हैं ।
