सरकारी योजना अगर सच में सशक्तिकरण के लिए है, तो उसे रेस क्यों बनाया गया है—जहाँ ₹10,000 उसी को मिलेगा जो पहले पहुँच जाए?
असल सवाल ये हैं:
-
❓ क्या ये योजना हमेशा के लिए है या तय समय सीमा तक?
-
❓ क्या महिलाओं को 31 दिसम्बर तक ही पहली किस्त मिलेगी, या कभी भी आवेदन करने पर?
-
❓ योजना की समीक्षा कब होगी, ताकि बाद में आवेदन करने वाली महिला उद्यमियों के लिए राशि समय के हिसाब से बढ़ाई जा सके?
-
❓ ₹10,000 पाने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल क्यों नहीं?
-
क्यों “फलां से मिलो”, “चिलना के पास जाओ”, “काग़ज़ दो”, “जांच होगी”—इतनी घुमावदार बोलिंग?
-
-
❓ गाँव वालों को जीविका के माध्यम से ही क्यों?
-
शहर वाले ऑनलाइन आवेदन करें, गाँव वाले समूह/व्यक्ति ढूँढते फिरें—ये दोहरा नियम क्यों?
-
अगर सरकार दे ही रही है, तो सीधा, पारदर्शी और समान तरीके से दे।
सशक्तिकरण का मतलब लाइन में खड़ा करना नहीं, बल्कि अधिकार देना है।
योजना मदद के लिए है या छँटनी के लिए—ये साफ़ होना चाहिए।
