उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित आईटी नीति के तहत आईटी सिटी विकसित करने पर 25 प्रतिशत या 100 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी भी दी जाएगी। फाइल में लखनऊ में एक बिजनेस इवेंट के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ को दिखाया गया है। फाइल फोटो | फोटो क्रेडिट: राजीव भट्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नई सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नीति को मंजूरी दी है जिसके तहत निजी आईटी कंपनियों को राज्य के युवाओं को रोजगार में वरीयता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। “यदि कोई कंपनी उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने में वरीयता देती है, तो उसके लिए भर्ती सहायता का प्रावधान किया गया है। यदि कोई संगठन कम से कम 30 ऐसे युवाओं को रोजगार दे रहा है जो यूपी से हैं, तो सरकार प्रत्येक के लिए 20,000 रुपये की एकमुश्त भर्ती सहायता प्रदान करेगी।

राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई आईटी नीति को अपनी मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य हर क्षेत्र (पूर्वांचल, पश्चिमांचल, मध्यांचल और बुंदेलखंड) में एक आईटी शहर और यूपी के सभी 18 प्रशासनिक प्रभागों में एक आईटी पार्क बनाना है। आईटी पार्क बनाने पर कंपनियों को 25 फीसदी या 20 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। आईटी सिटी विकसित करने पर 25 प्रतिशत या 100 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी भी दी जाएगी। साथ ही स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी।

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अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए रोजगार प्रदान करने वाली इकाइयों को छूट

नई नीति के तहत, राज्य सरकार महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों, ट्रांसजेंडरों और विकलांग लोगों को रोजगार देने वाली आईटी इकाइयों को भी छूट प्रदान करेगी। नीति उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने कौशल को बढ़ाने के लिए छात्रों या कर्मचारियों को भी बुलाती है। कौशल विकास के लिए चयनित पाठ्यक्रमों और संस्थानों में ऑनलाइन या ऑफलाइन अध्ययन के लिए सरकार पाठ्यक्रम शुल्क का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹50,000 तक वहन करेगी।

By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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