राज्य सरकार ने विभागों से कहा है कि जहां आरक्षण लागू है, वहां पदोन्नति प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया जाए, क्योंकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए बढ़ाए गए कोटे के तहत नया रोस्टर तैयार किया जा रहा है। साथ ही एक नवंबर से 17 नवंबर के बीच दिए गए प्रमोशन भी वापस ले लिए गए हैं।

मुख्य सचिव वंदिता शर्मा के एक सर्कुलर में कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शैक्षिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्ति या पदों का आरक्षण) अध्यादेश, 2022 का हवाला दिया गया है, जिसे अस्थायी रूप से पदोन्नति प्रक्रिया को रोकने के लिए राज्यपाल द्वारा अक्टूबर में प्रख्यापित किया गया था। 1 नवंबर के बाद की गई पदोन्नति को वापस लेने पर एक अलग सर्कुलर जारी किया गया था।

राज्य सरकार के एससी/एसटी कर्मचारी संघ ने एससी और एसटी के लिए क्रमश: 15% और 3% की दर से होने वाली पदोन्नति को रोकने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। इसने लोक निर्माण, शिक्षा और पुलिस विभागों में पुराने आरक्षण कोटा के तहत कई पदोन्नति जल्दबाजी में प्रभावित होने की ओर इशारा किया।

राज्य सरकार ने 1 नवंबर से अध्यादेश के प्रावधानों को प्रभावी करते हुए एक आदेश जारी किया। अध्यादेश में अनुसूचित जाति का आरक्षण कोटा 15% से बढ़ाकर 17% और अनुसूचित जनजाति का 3% से 7% कर दिया गया है। राज्य में कुल आरक्षण मैट्रिक्स अब 56% है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष डी. चंद्रशेखरैया ने बताया कि अध्यादेश लागू होने के बाद भी पुराने कोटे के तहत पदोन्नति दी गई। जहां हमने इस तरह की जल्दबाजी में पदोन्नति पर सवाल उठाया है, वहीं हमने मुख्य सचिव से पुरानी कोटा प्रणाली में की गई पदोन्नति को रद्द करने का भी अनुरोध किया है.’

By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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