ललित मोदी ने केके मोदी फैमिली ट्रस्ट छोड़ा  मां-बहन से बढ़ा झगड़ा?


इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी ने रविवार को अपने बेटे रुचिर मोदी को केके मोदी फैमिली ट्रस्ट की शाखा का नया प्रमुख और लाभार्थी नामित किया। सोशल मीडिया के जरिए इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने बेटे और बेटी से सलाह मशविरा करने के बाद वह अब और भविष्य में भी अपना लाभकारी हित छोड़ रहे हैं।

ललित मोदी ने कहा कि उनकी मां बीना मोदी और बहन चारु मोदी के साथ पारिवारिक कलह ने उन्हें बहुत पीड़ा पहुंचाई है। “मेरी माँ और बहन के साथ वर्तमान मुकदमेबाजी थकाऊ, ज़ोरदार है, और लंबे समय से चली आ रही है, और भले ही निपटान के लिए कई दौर की चर्चाएँ हुई हों, लेकिन कोई अंत नहीं दिख रहा है। इसने मुझे अपार कारण दिया है और जारी है संकट, “उन्होंने लिखा।

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अपनी बेटी के साथ इस पर चर्चा की थी और वे दोनों मानते हैं कि एलकेएम (ललित कुमार मोदी) परिवार के मामलों के साथ-साथ ट्रस्ट में इसके लाभकारी हित का नियंत्रण बेटे रुचिर मोदी को हस्तांतरित किया जाना चाहिए।

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ललित ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में त्याग पत्र साझा करते हुए कैप्शन दिया, “मैं जो कुछ भी झेला हूं, उसके प्रकाश में, यह रिटायर होने और आगे बढ़ने का समय है। और मेरे बच्चों को तैयार करो। मैं उन्हें सब सौंप रहा हूं।

गौरतलब है कि ललित ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट की एक श्रृंखला में खुलासा किया कि वह “कोविड -19 और गहरे निमोनिया” से पीड़ित होने के बाद 24/7 ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे।

आईपीएल के संस्थापक-अध्यक्ष ललित मोदी पर कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग सहित अन्य मामलों में आरोप लगने के बाद से वे फरार चल रहे हैं।

By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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