बजट 2023: डायरेक्ट टैक्स क्या है?  अर्थ, प्रकार और महत्व


एक प्रत्यक्ष कर वह है जो किसी व्यक्ति या संगठन की आय या धन पर लगाया जाता है। शब्द “प्रत्यक्ष” इस तथ्य को संदर्भित करता है कि कर देयता उस व्यक्ति या संस्था पर आती है जो आय अर्जित कर रही है या धन धारण कर रही है, और इसका भुगतान सीधे सरकार को किया जाता है। प्रत्यक्ष कर किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को हस्तांतरणीय नहीं हैं। आयकर, कॉर्पोरेट कर और संपत्ति कर सभी प्रत्यक्ष करों के उदाहरण हैं।

प्रत्यक्ष कर के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

दो प्रमुख प्रत्यक्ष कर आयकर और कॉर्पोरेट कर हैं।

आयकर व्यक्तियों और व्यवसायों की कमाई पर लगाया जाता है। आय कर की दर अर्जित आय की राशि और करदाता की श्रेणी के अनुसार भिन्न होती है। केंद्र एक प्रगतिशील आयकर प्रणाली को नियोजित करता है, जिसका अर्थ है कि आय के स्तर में वृद्धि के साथ कर की दरें बढ़ती हैं।

कॉर्पोरेट टैक्स व्यवसायों के मुनाफे पर लगाया जाता है। भारत में कॉर्पोरेट टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि कंपनी घरेलू है या विदेशी। इसके अलावा, कॉर्पोरेट टैक्स एक अधिभार और उपकर के अधीन है।

इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स के अलावा, सरकार कैपिटल गेन टैक्स, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स और वेल्थ टैक्स लगाती है।

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सरचार्ज और सेस में क्या अंतर है?

अधिभार विशिष्ट करदाताओं या आय के प्रकार पर लगाया जाने वाला एक अतिरिक्त कर है। अधिभार दरें आम तौर पर मूल कर दर का एक प्रतिशत होती हैं, और उनका उद्देश्य सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करना होता है।

एक उपकर विशिष्ट वस्तुओं या सेवाओं पर लगाया जाने वाला कर है, जिसका उपयोग विशिष्ट सरकारी कार्यक्रमों या पहलों के लिए किया जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अधिभार और उपकर की दरें आमतौर पर विभिन्न करदाताओं और आय प्रकारों के लिए अलग-अलग होती हैं। वे सरकार की नीतियों के अनुसार परिवर्तन के अधीन भी हैं।

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प्रत्यक्ष कर लगाने का उद्देश्य क्या है?

प्रत्यक्ष कर, सामान्य तौर पर, अर्थव्यवस्था में सरकारी खर्च के वित्तपोषण और आय के पुनर्वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्यक्ष कर राजस्व का उपयोग सरकार द्वारा सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं जैसे बुनियादी ढांचे और शिक्षा के साथ-साथ प्रगतिशील कर प्रणालियों के माध्यम से आय असमानता को कम करने के लिए किया जाता है।


By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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