मैसूर

कर्नाटक के किसान बुधवार को संसद में पेश होने वाले केंद्रीय बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी पर एक कानून की घोषणा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

कर्नाटक राज्य गन्ना किसान संघ के अध्यक्ष कुरुबुर शांताकुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल नई दिल्ली में किसानों की विरोध रैली के दौरान किसानों को एमएसपी की गारंटी पर कानून बनाने का आश्वासन दिया था।

एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है, उन्होंने यह कहते हुए खेद व्यक्त किया कि किसान इस संबंध में एक घोषणा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को कृषि उत्पादों, उर्वरकों, कीटनाशकों और सिंचाई के अन्य उपकरणों पर लगने वाले जीएसटी को हटाना चाहिए।

उन्होंने सरकार की कृषि ऋण नीति में भी बदलाव की मांग की। श्री शांताकुमार ने कहा कि यदि देश की खाद्य सुरक्षा की रक्षा करनी है तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को सभी बैंकों द्वारा ब्याज मुक्त कृषि ऋण दिया जाए।

साथ ही, उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि ऋण स्वीकृत करते समय बैंकों द्वारा CIBIL स्कोर पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। कृषि ऋण किसानों की भूमि के मूल्य के आधार पर दिया जाना चाहिए।

गन्ना उत्पादन की लागत में वृद्धि के मद्देनजर, श्री शांताकुमार ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वर्ष 2023-24 के लिए उचित और पारिश्रमिक मूल्य (FRP) 9.5 प्रतिशत वसूली के लिए 3,500 रुपये तय किया गया है। कृषि क्षेत्रों में गन्ने के लिए परिवहन और अन्य शुल्कों को शामिल किए बिना एफआरपी दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को गन्ने से एथनॉल उत्पादन के लिए भी नीति लानी चाहिए।

उन्होंने केंद्र से वनों की सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले किसानों द्वारा सामना किए जाने वाले मानव-पशु संघर्षों पर गौर करने और किसानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कानून लाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे जंगली जानवरों के हमले में जानमाल के नुकसान के मुआवजे को बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सभी कृषि फसलों को संबंधित अधिनियम में संशोधन करके फसल बीमा योजना जैसी बीमा योजनाओं के तहत लाया जाना चाहिए।

By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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