क्या सच में जदयू अध्यक्ष श्री ललन सिंह ने मिट, घट जाने पर, मुंगेर के लोगो को कुकुर खिला दिया ?क्या सच में जदयू अध्यक्ष श्री ललन सिंह ने मिट, घट जाने पर, मुंगेर के लोगो को कुकुर खिला दिया ?

क्या सच में जदयू अध्यक्ष श्री ललन सिंह ने मिट, घट जाने पर, मुंगेर के लोगो को कुकुर खिला दिया ?

BIHAR के मिथिलांचल में एक प्रचलित कहावत है – कही त माय मारल जै नै कही त बाप पिल्ला खाय! वैसे तो इसका अर्थ मोटे तौर पर हिंदी के “आगे कुंआ पीछे खाई” या अंग्रेजी के “between the devil and the deep sea” जैसा है, लेकिन इसके पीछे एक कहानी होती है। कहानी कुछ यूँ है कि एक व्यक्ति था, जिसके परिवार में तीन ही लोग – वो स्वयं, उसकी पत्नी और एक बेटा था। एक दिन सुबह वो बाजार से पाव भर मीट खरीद लाया और पत्नी को बनाने के लिए देकर खेतों पर, अपने काम पर चला गया।

प्रेशर कुकर का जमाना नहीं था, कुछ इस वजह से, और पत्नी मीट की थोड़ी शौक़ीन भी थी इसलिए भी, बनाते-बनाते वो युवती चखकर देख रही थी कि मांस पका या नहीं। पाव भर होता ही कितना है? चखने-चखने में ही स्त्री ने पूरा मांस समाप्त कर डाला। अब पति लौटता और उसे सारा मांस अकेले भकोस लेने के उलाहने देता। तो स्त्री ने तरकीब सोची। वहीँ एक कुत्ते का पिल्ला खेल रहा था। पत्नी ने उसे ही काटकर पका डाला। उसका बेटा वहीँ आंगन में ही खेल रहा था और सारी हरकतें देख रहा था।

उस समय तो बच्चे ने कुछ नहीं कहा, मगर जब उसके पिता घर लौटे और खाना खाने बैठे तो बच्चे ने गाना शुरू किया, कही त माय मारल जै नै कही त बाप पिल्ला खाय! यानी अगर मैंने कुछ कहा तो निश्चित रूप से कुत्ता परोस देने के लिए माँ पिट ही जाएगी, और जो कुछ नहीं कहा तो बाप कुत्ते का पिल्ला खायेगा! बिहार की राजनीति में आजकल अफवाहों का बाजार गर्म है। कुछ दिन पहले जद(यू) के ललन सिंह ने जो मटन-चावल की दावत दी थी, उसपर भाजपा वालों ने शराब बाँटने का आरोप लगाया। इसके बाद ललन सिंह ने भाजपा के सम्राट चौधरी को लीगल नोटिस भेज दिया है।

अभी लीगल नोटिस पहुंचा ही था कि नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने मुंगेर शहर से कुत्तों के गायब होने की बात कर दी। भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद भी कुछ ऐसी ही बात ट्वीट कर चुके हैं। कुत्ता प्रेमियों को इस मसले पर ध्यान देना चाहिए। कुत्तों को ऐसे मारकर खा जाना ठीक तो नहीं! वैसे जिसे पता भी होगा कि कौन सा जानवर भोज में परोसा गया था, वो अपने ही शहर के लोगों के बारे में क्या कहेगा? कही त माय मारल जै नै कही त बाप पिल्ला खाय! बाकि उच्च-स्तरीय जांच करके ऐसी अफवाहों पर विराम लगाना चाहिए। राजनीति का कुत्तों के स्तर पर पहुँच जाना कोई अच्छी बात तो नहीं।

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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