इंटैक, पटना चैप्टर द्वारा आयोजित पटना कलम पेंटिंग्स शैली का सातवां प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष नन्दकिशोर यादव ने कहा कि पटना सिटी क्षेत्र को हजार वर्षों से अधिक समय तक भारत की राजधानी रहने का गौरव प्राप्त रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा समेकित प्रयास होगा कि यह शैली फिर से जीवंत हो जाय। पटना की महापौर सीता साहू ने पटना कलम पेंटिंग्स शैली को जीवन्त बनाने के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस पीढ़ी के चित्रकारों पर अब यह दायित्व आ गया है। आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए समाजसेवी राजेश वल्लभ ने कहा कि समाज और सरकार, दोनों के प्रयास से ही यह शैली जीवंत हो सकती है। आनंद मोहन झा ने प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते हुए कहा कि जब तक हरेक घरों तक पटना कलम की पेंटिंग्स नहीं पहुंचेंगी, तब तक इसे जीवंत नहीं माना जाएगा। इंटैक, पटना चैप्टर के संयोजक भैरव लाल दास ने कहा कि इस शैली को जीवन्त बनाने के लिए पटना सिटी क्षेत्र में लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने मांग किया कि पटना सिटी क्षेत्र में एक आर्ट गैलरी की आवश्यकता है। प्रशिक्षण के संयोजक कमल नयन श्रीवास्तव ने आशा व्यक्त किया कि स्कूल, कॉलेज और कला संस्थानों में ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है। वरिष्ठ कलाकार और प्रशिक्षक जीतेंद्र मोहन ने संतोष व्यक्त किया कि इतने कम समय में अच्छे पेंटिंग्स तैयार हुए हैं। पटना कलम के विश्व प्रसिद्ध कलाकार मुंशी महादेव लाल के पौत्र निर्मल कुमार श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मेरे लिए अलग से प्रसन्नता का विषय है कि मेरे जीवन काल में ही पटना कलम पेंटिंग्स को जीवन्त बनाने का प्रयास आरम्भ हो गया। इस अवसर पर दीपक बक्शी, आलोक चोपड़ा, संजय राय, वरिष्ठ कला शिक्षक कृष्ण पंडित, यासर अराफात, अंजनी कुमार, निशांत श्रीवास्तव, छाया ज्योति, अमितेश, मनीषा, अनुपमा, विनोद कुमार, राजेश राज, देवेंद्र बहादुर माथुर सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, पत्रकार एवं समाजसेवी उपस्थित थे। इस अवसर पर गिरिराज उत्सव पैलेस में पटना कलम के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई।
