अस्वीकृति पर मनोज बाजपेयी: 'विफलता के समय, मैं एक बुरा अभिनेता नहीं बना'

वीडियो के एक सीन में मनोज बाजपेयी। (सौजन्य: अर्थ- ए कल्चर फेस्ट)

नयी दिल्ली:

मनोज बाजपेयी ने हाल ही में इस बारे में बात की कि उन्होंने अपने करियर में अस्वीकृति और असफलता से कैसे निपटा। अर्थ: ए कल्चर फेस्ट में बोलते हुए, अभिनेता ने कहा, “जब कोई काम नहीं होता है, तो बहुत काम होता है।” मनोज बाजपेयी ने कहा कि अस्वीकृति, असफलता या सफलता किसी व्यक्ति को परिभाषित नहीं करती है। उन्होंने आगे कहा, “अस्वीकृति आपको कभी परिभाषित नहीं करती है। असफलता आपको कभी परिभाषित नहीं करती। इसी तरह, सफलता आपको परिभाषित नहीं करती है। मनोज बाजपेयी जी अभिनेता आज है वो 30 साल पहले भी वही अभिनेता था। [There has been no change in the last 30 years. I am the same actor.]

असफलता के बारे में बात करते हुए और उन्हें क्या चल रहा था, मनोज बाजपेयी ने कहा, “असफलता के समय, मैं एक बुरा अभिनेता नहीं बना। मैं वही अभिनेता था। जो मैं काम कर रहा था वो कमर्शियल मार्केट का जो इंटरप्रिटेशन उसके हिसाब से मैं फेल था. लेकिन मेरी नजरो में मेरा काम फलीउरे नहीं था। [At that time, my work wasn’t up to the mark according to the interpretation of commercial market. But that’s wasn’t the case for me.]”

उसने जारी रखा, “मैं सिर्फ एक बात जनता है। एक दिन आएगा मौका मिलेगा और मैं आ जाऊंगा। [I was confident that one day I will get a chance to make a comeback.] वीडियो को नीलेश मिश्रा ने इंस्टाग्राम पर कैप्शन के साथ शेयर किया है, “जब काम नहीं है तो काम बहुत है।” अस्वीकृति और असफलता से निपटने के लिए एकमात्र मनोज बाजपेयी से जीवन के सबक। जैसा कि मैंने इस बातचीत में कहा है, “मनोज बाजपेयी ऐसे ही नहीं बनते।”‘

मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म में नजर आएंगे गुलमोहर। फिल्म में दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर भी हैं। अमोल पालेकर, सूरज शर्मा, कावेरी सेठ, नरगिस नांदल और तृप्ति साहू भी इस परियोजना का हिस्सा हैं। राहुल चित्तेला निर्देशित यह फिल्म 3 मार्च को डिज्नी प्लस होस्टार पर रिलीज होगी।

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यह रणबीर कपूर की मकर इलेवन बनाम सौरव गांगुली की झूटी इलेवन है



By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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