कुत्ते, बिल्ली समेत पालतू जानवरों से बात करना होगा मुमकिन, इस टेक्‍नॉलजी से आएगी क्रांति

हम में से कई लोग अपने पालतू जानवरों के साथ संवाद (Communicate) करते हैं। संवाद का यह तरीका भाषाई नहीं, भावनाओं पर आधारित होता है। बातचीत के इस तरीके में अक्‍सर पालतू जानवर, इंसानों की बात को समझते हैं और कई बार तो कही हुई बात को पूरा भी करते हैं। पालतू डॉगी और इंसान के मामले में कम्‍युनिकेट करना और भी व्‍यवहारिक दिखाई देता है। भविष्‍य में पालतू जानवरों के साथ संवाद करना और आसान हो सकता है। आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बदौलत यह सब हकीकत हो सकता है। 

आजकल चैट जीपीटी (Chat GPT) जैसे एआई टूल की काफी चर्चा है। इसके लिए लोग अपनी छोटी से छोटी प्रॉब्‍लम को सॉल्‍व कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जानवरों की भाषा को समझने के लिए वैज्ञानिक एक AI डिवाइस विकसित करने पर काम कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि ‘डॉ डूलिटल डिवाइस’ (Dr Doolittle device) नाम की यह मशीन जानवरों की भाषा को डिकोड कर सकेगी। यह उनकी भाषा को पूरी तरह समझने में सक्षम होगी। 

वर्ल्‍ड इकॉनमिक फोरम की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि साइंट‍िस्‍ट, जानवरों की भाषाओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस ने जबरदस्‍त तरीके से विकास किया है। एआई चैटबॉट्स की कामयाबी किसी से छुपी नहीं है। ये अपने कस्‍टमर्स के साथ सहजता से बात करते हैं। अगर वैज्ञानिक, जानवरों की भाषाओं को समझने में कामयाबी हासिल करते हैं, तो इससे उनकी सस्‍टेनेबिलिटी को समझने में काफी मदद मिल सकती है। 

रिपोर्ट कहती है कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें जानवरों की भाषा को समझने या कम्‍युनिकेट करने की अनुमति देता है, तो हम जल्द ही जानवरों के बारे में बहुत सी बातें समझने में सक्षम हो सकते हैं। लोग अपने पालतू जानवरों के साथ और सहजता से पेश आ सकते हैं, उनकी परेशानी को आसानी से समझ सकते हैं। रिपोर्ट में यह डेडलाइन नहीं दी गई है कि डिवाइस कब तक तैयार हो सकती है, लेकिन यह भविष्‍य में इंसान और जानवरों के बीच रिलेशन की एक रूपरेखा जरूर तैयार करती है। 
 

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By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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