Google ने अपने AI टूल Bard के लिए कर्मचारियों को भेजे कुछ खास निर्देश, ये है पूरी लिस्ट

Google की पेरेंट Alphabet ने हाल ही में AI Bard की घोषणा की, जो ChatGPT को टक्कर देगा। यह फिलहाल टेस्टिंग फेज में है और बहुत कम यूजर्स के पास इसका एक्सेस है। हाल ही में बार्ड की वजह से कंपनी को 100 अरब डॉलर के लगभग नुकसान उठाना पड़ गया था, जिसका कारण था AI टूल का एक सवाल का गलत जवाब देना। शायद यही कारण है कि Google के उपाध्यक्ष प्रभाकर राघवन यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कंपनी के नए चैटजीपीटी प्रतियोगी सही उत्तर दे। इसके लिए कर्मचारियों को बकायदा एक ईमेल भेजा गया है, जिसमें उन्हें बताया गया है कि Bard को लेकर उन्हें क्या करना है और क्या नहीं।

CNBC के अनुसार,  Google के उपाध्यक्ष प्रभाकर राघवन ने अपने कर्मचारियों को ईमेल किया, जिसमें कुछ क्या करें और क्या न करें (Do’s & Don’ts) की बताए गए। इसमें एक पेज का लिंक दिया गया, जिसमें निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों को आंतरिक रूप से Bard का परीक्षण करने के दौरान उत्तरों को कैसे ठीक करना चाहिए। क्या करें और क्या न करें अनुभाग के शीर्ष पर, Google कर्मचारियों को “बार्ड को पढ़ाने से पहले” क्या विचार करना चाहिए, इसके लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। Google कर्मचारियों को ईमेल में क्या करें और क्या न करें साझा किए गए हैं।

रिपोर्ट में बताए कुछ डूज़ (क्या करें) की बात करें, तो इसमें कहा गया है, “बार्ड उदाहरण के द्वारा सबसे अच्छा सीखता है, इसलिए प्रतिक्रिया को फिर से लिखने के लिए समय लेने से हमें मोड में सुधार करने में मदद मिलेगी।” इसके अलावा, टेस्टर्स को कहा गया है कि प्रतिक्रियाओं को “विनम्र, आकस्मिक और सुलभ” रखें। यह भी कहा गया है कि “प्रश्नों के उत्तर को “फर्स्ट परसन” होना चाहिए।” इसके अलावा, “एक “निर्विवाद, न्यूट्रल टोन” बनाए रखने का भी आदेश है। आखिर में “Google कर्मचारियों को “कानूनी, चिकित्सा, वित्तीय सलाह” प्रदान करने वाले या घृणित और अपमानजनक जवाब देने के लिए “थम्स डाउन” देने का निर्देश दिया गया है।

कुछ डोन्ट्स (क्या न करें) भी है, जिनमें पहला पॉइन्ट है कि “कर्मचारियों “जाति, राष्ट्रीयता, लिंग, आयु, धर्म, यौन अभिविन्यास, राजनीतिक विचारधारा, स्थान, या इसी तरह की श्रेणियों के आधार पर अनुमान लगाने से बचें।” डॉक्यूमेंट में आगे कहा गया है, “बार्ड को एक व्यक्ति के रूप में वर्णित न करें, भावनाओं को व्यक्त करें, या मानव-समान अनुभवों का दावा करें।” इसके अलावा, रिराइटिंग के लिए मना किया गया है। डॉक्यूमेंट कहता है, “इसे दोबारा लिखने की कोशिश न करें; हमारी टीम इसे वहां से ले जाएगी।”

By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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