पिछले 1 वर्ष में बिहार में हो चुकी 39 फिल्मों की शूटिंग
– फिल्मों की शूटिंग के लिए बिहार के कई स्थलों की बढ़ रही लोकप्रियता
– अब तक बिहार में 39 फिल्मों के शूटिंग की दी जा चुकी है अनुमति
पटना। अब बॉलीवुड से लेकर टॉलीवुड की फिल्मों में जल्द ही बिहार के मनोरम एवं ऐतिहासिक स्थानों के दृश्य देखने को मिलेंगे। सरकार की वर्ष 2024 में आई फिल्म प्रोत्साहन नीति के कारण पिछले एक वर्ष में 39 फिल्मों को शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है। इसमें 33 फिल्मों की शूटिंग भी अलग-अलग स्थानों पर पूरी हो चुकी है। जबकि, शेष फिल्मों की शूटिंग जारी है। खास बात यह है कि ये फिल्में सिर्फ भोजपुरी तक सीमित नहीं हैं। बल्कि हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी और मगही जैसी कई भाषाओं में बनाई जा रही हैं। इससे बिहार बहुभाषी और विविधतापूर्ण सिनेमा निर्माण का उभरता हुआ केंद्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
रूपहले पर्दे पर भी राज्य की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य की छटा देखने को मिलेगी। फिल्मों की शूटिंग करने वालों के लिए यहां माहौल बेहद फ्रेंडली प्रतित हो रहा है। इस कारण बड़ी संख्या में देश-विदेश के निर्माता-निर्देश यहां के अलग-अलग स्थानों में शूटिंग की रूचि दिखा रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में है राज्य सरकार की दूरदर्शी ‘बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति’ है, जिसने बिहार को फिल्म निर्माण के नए नक्शे पर स्थापित कर दिया है।
फिल्म निर्माता को अपनी फिल्मों के लोकेशन के लिए मुंबई और दिल्ली से बेहतर विकल्प पटना, राजगीर, नालंदा, गया, भागलपुर और मोतिहारी जैसे शहरों में मिल रहे हैं। इन स्थानों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक खूबसूरती शूटिंग के लिए बेहद पसंद किए जा रहे हैं। यहां शूटिंग होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है। होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट और अन्य सहायक सेवाओं में मांग तेजी से बढ़ी है। इससे स्थानीय स्तर पर कई तरह के रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं। फिल्म से जुड़े कई क्षेत्रों में भी अवसर बढ़ रहे हैं। स्थानीय युवाओं को कैमरा ऑपरेशन, साउंड रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और प्रोडक्शन मैनेजमेंट जैसी विधाओं में प्रशिक्षण के साथ ही रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। बिहार राज्य फिल्म विकास निगम की तरफ से आयोजित वर्कशॉप, एक्सपर्ट मास्टर क्लास और स्क्रिप्ट राइटिंग सेमिनारों ने भी एक मजबूत फिल्म से जुड़े इको सिस्टम को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
फिल्म टूरिज्म को भी प्रोत्साहन
फिल्म प्रोत्साहन नीति की सबसे खास बात ‘फिल्म टूरिज्म’ को प्रोत्साहित करना भी है। इसके तहत किसी फिल्म में जब किसी स्थान को दिखाया जाता है, तो वह अपने आप पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। इसी विचारधारा के तहत उन फिल्मों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया है, जिनमें राज्य के पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से दर्शाया गया हो। राजगीर, नालंदा, सोनपुर मेला और भागलपुर की घाटों अब फिल्मों के साथ-साथ पर्यटकों की पसंदीदा सूची में भी शामिल हो रहे हैं।
गोवा फिल्म फेस्टिवल में बिहार पवेलियन का जलवा
हाल में गोवा में आयोजित 5 दिवसीय फिल्म फेस्टिवल में भी बिहार पवेलियन का जलवा बरकरार रहा। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के 56वें संस्करण में बिहार पवेलियन में सबसे ज्यादा भीड़ रही। इसमें बिहार की फिल्म प्रोत्साहन नीति, यहां शूटिंग करने से मिलने वाले फायदे, और यहां के शूटिंग लोकेशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस महोत्सव में दुनियाभर के फिल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता और फिल्म जगत के लोग जुटे थे इसका फायदा यह हुआ कि महज 2 महीनों में ही 9 फिल्मों की शूटिंग के आवेदन आ गए, जिन्हें शूटिंग की अनुमति मिली।
कोट में……..
इस मामले में कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री श्री अरूण शंकर प्रसाद का कहना है कि बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति ने राज्य की छवि को नया आयाम दिया है। 40 फिल्मों की शूटिंग अनुमति, बहुभाषी सिनेमा, स्थानीय रोजगार और फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा देकर बिहार को उभरते फिल्म हब के रूप में स्थापित किया है। मार्च–अप्रैल महीने में मुंबई में फिल्म निर्माता–निर्देशकों के साथ बैठक आयोजित करने की योजना है।
