✍️ OPINION

बिहार में सब ठीक है — क्योंकि किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता

बिहार में पगला मुख्यमंत्री कुर्सी पर कायम है।
और उसके शासनकाल में बेटियों की अस्मत लुटी जा रही है।
लेकिन क्या फ़र्क़ पड़ता है?

खगड़िया में बच्ची से दरिंदगी होती है।
जहानाबाद से पटना गई एक युवती की हत्या हो जाती है।
समस्तीपुर के ताजपुर में एक गरीब घर के लड़के के
प्राइवेट पार्ट में पुलिस द्वारा पेट्रोल के इंजेक्शन का आरोप लगता है।

लेकिन क्या फ़र्क़ पड़ता है?

🙃 सब चुप हैं, इसलिए सब सामान्य है

माताएँ असुरक्षित हैं।
बहनें असुरक्षित हैं।
गरीब आदमी की देह तक सुरक्षित नहीं है।

लेकिन क्या फ़र्क़ पड़ता है?

मुख्यमंत्री चुप हैं।
गृह मंत्री तमाशा देख रहे हैं।
नेता बयान देंगे, फिर भूल जाएँगे।

और जनता?
वो भी चुप है।

शायद इसलिए यह सब सामान्य लगता है।


⚖️ जुर्म पर मौन — नई सामाजिक नीति

ध्यान रखिए—
जुर्म पर मौन कोई मजबूरी नहीं,
अब यह आदत बन चुकी है।

आज अगर आप चुप हैं,
तो यह मत मानिए कि आप सुरक्षित हैं।
आप बस कतार में खड़े हैं


🪑 लोकतंत्र का नया गणित: ऊपर सब ठीक, नीचे योग्यता अनिवार्य

अब ज़रा इस व्यवस्था को समझिए।

आप विधायक बन सकते हैं।
आप सांसद बन सकते हैं।
इसके लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नहीं चाहिए।

लेकिन—

बिहार के पंचायती चुनावों में अब पात्रता बदली गई है।

पहले जहाँ निरक्षर व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकता था,
अब तय किया गया है कि—

  • मुखिया बनने के लिए कम से कम 10वीं पास

  • सरपंच बनने के लिए कम से कम 12वीं पास होना ज़रूरी होगा।

सब ठीक है।
क्योंकि किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।

यह कानून का सवाल नहीं है।
यह संविधान की आत्मा का सवाल है।

अगर लोकतंत्र में सबसे बड़े पद
बिना पढ़ाई के मिल सकते हैं,
तो गाँव के सबसे निचले पदों पर
अचानक योग्यता का यह बोझ क्यों?

यह योग्यता नहीं है।
यह चयनात्मक नैतिकता है।


🐘 जिसकी लाठी, उसकी भैंस — और सब मौन

आज बिहार का नियम सीधा है—

गरीब के लिए नियम।
रसूखदार के लिए रास्ता।

सख़्त पुलिस — जनता के लिए।
नरम पुलिस — रसूख के लिए।

जो अफ़सर सख़्ती दिखाए,
उसका इनाम तय है—
तबादला।

लेकिन क्या फ़र्क़ पड़ता है?
यह भी तो अब सामान्य हो चुका है।


📰 मीडिया: शांति बनाए रखना ज़रूरी है

मीडिया मैनेज किया जाता है।
कुछ पत्रकारों को घर मिलते हैं,
कुछ को गाड़ी।

जिनका लंबा अनुभव अपराध और सत्ता की आलोचना में रहा,
आज वही लोग नीति-वंदन में व्यस्त हैं।

सब शांत है।
सब संतुलित है।

मेरे मन में
इन दो कौड़ी के नौकरों के लिए
कोई सम्मान नहीं है।


🚨 विकास आएगा — शायद

कहा जाता है उद्योग आएगा।
विकास आएगा।

लेकिन अगर रात में काम पर जाती बेटी सुरक्षित नहीं है,
तो यह विकास किसके लिए है?

कोई जवाब नहीं।
पर कोई सवाल भी नहीं।


👮 आख़िरी उम्मीद

अब आख़िरी उम्मीद
पुलिस और प्रशासन से ही बची है।

मुझे मालूम है—
बिहार पुलिस में
आज भी कई लोग ईमानदार हैं।

लेकिन रसूख के सामने
ईमानदारी अक्सर
नोटिस बोर्ड तक सिमट जाती है।

शायद अब उन्हें
अपनी ली हुई शपथ याद करनी होगी।


🔚 निष्कर्ष: सबसे बड़ा अपराध — हमारा मौन

इस राज्य को
सबसे ज़्यादा ख़तरा
अपराध से नहीं है।

सबसे ज़्यादा ख़तरा
हमारे मौन से है।

क्योंकि जब समाज कह देता है—
“हमें क्या फ़र्क़ पड़ता है”
तब सत्ता को
सब कुछ करने की छूट मिल जाती है।

बाक़ी—
स्वयं विचार कीजिए।


✍️ Opinion | शुभेंदु प्रकाश
Aware News 24

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *