✍️ शुभेंदु प्रकाश
बिहार सरकार और बिजली विभाग इन दिनों बड़े गर्व से “डिजिटल समाधान” का ढिंढोरा पीट रहे हैं।
अख़बारों में विज्ञापन हैं,
पोर्टल लॉन्च हो रहे हैं,
121 नंबर और ऑनलाइन शिकायत की बातें हो रही हैं।
लेकिन ज़मीनी हकीकत क्या है?
मैं, शुभेंदु प्रकाश, पिछले 12 वर्षों से बिहार के बिजली विभाग की गलत बिलिंग, फर्जी एवरेज और उपभोक्ता उत्पीड़न का शिकार हूँ।
और आज मैंने उस पूरे झूठ को पकड़ लिया है।
बंद मकान में 300 यूनिट बिजली?
मेरा घर गाँव में है।
वहाँ कोई रहता ही नहीं।
फिर भी बिजली विभाग हर महीने
300 यूनिट, 500 यूनिट, कभी ₹15,000 तो कभी ₹2 लाख तक का बिल भेजता रहा।
मीटर लगा है।
रीडिंग साफ़ है।
फिर भी वे “एवरेज बिलिंग” ठोक देते हैं।
2015 तक जब बिल सही आता था,
मैंने हर पैसा चुकाया।
लेकिन जब से मकान बंद हुआ —
बिजली विभाग ने इसे लूट का केंद्र बना लिया।
मोबाइल नंबर जानबूझकर गलत रखा गया
बिल पर मेरा मोबाइल नंबर जानबूझकर गलत डाला गया ताकि
मुझे SMS न आए,
ई-मेल न मिले,
और जब लाखों का बिल बने — तब सीधे नोटिस भेजा जाए।
मैंने दर्जनों बार पत्र लिखा।
रजिस्टर्ड रिसीविंग है।
2015 की शिकायतें आज भी मेरे पास दस्तावेज़ों में मौजूद हैं।
लेकिन बिजली विभाग ने कभी सुधार नहीं किया।
नया धोखा: डिजिटल कंज़्यूमर पोर्टल
हाल ही में मैंने नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के विज्ञापन देखे —
कि अब शिकायत ऑनलाइन दर्ज करें।
मैं खुश हुआ।
मैंने पूरा फॉर्म भरा —
मीटर नंबर
खाता संख्या
घर का पता
दस्तावेज़
PDF शिकायत
सब कुछ।
लेकिन जब Submit दबाया… कुछ नहीं हुआ।
ना error
ना confirmation
ना ticket number
सिर्फ एक मूक धोखा।
अगर कोई फ़ील्ड हटाओ, तो सिस्टम तुरंत कहता है “error”
लेकिन जब सब सही हो, तब submit ही नहीं होता।
मतलब साफ़ है —
पोर्टल बनाया ही गया है ताकि शिकायत दर्ज न हो सके।
बिजली विभाग का असली मॉडल
-
बंद मकान खोजो
-
एवरेज बिल ठोको
-
मार्च में भारी बिल भेजो
-
डराकर पैसा वसूलो
-
अकाउंट बुक में “प्रॉफिट” दिखाओ
यह केवल मेरे साथ नहीं हो रहा —
यह पूरे बिहार के लाखों उपभोक्ताओं के साथ हो रहा है।
महिला अधिकारी द्वारा बदतमीज़ी
जब मैंने नॉर्थ बिहार पावर के कार्यालय से संपर्क किया,
तो एक महिला अधिकारी ने मुझसे कहा:
“आप क्या जला रहे हैं, हमें क्या पता?”
यही उनका जवाब था।
जबकि मैंने बार-बार कहा कि घर बंद है,
मीटर लगा है,
रीडिंग देखिए।
लेकिन कोई सुनवाई नहीं।
अब बात कोर्ट तक जाएगी
मैं अब यह मामला
Consumer Forum
Electricity Ombudsman
और ज़रूरत पड़ी तो Supreme Court तक ले जाऊँगा।
बिजली विभाग को
₹5 लाख तक का मुआवज़ा देना होगा —
क्योंकि यह केवल गलत बिलिंग नहीं,
मानसिक उत्पीड़न और वित्तीय धोखाधड़ी है।
यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं है
यह हर उस बिहारवासी की लड़ाई है
जिसका घर बंद है,
जो बाहर काम करता है,
जिसे एवरेज बिलिंग से लूटा जा रहा है।
अगर सिस्टम चुप्पी पर चलता है,
तो पत्रकारिता बोलेगी।
🔴 निष्कर्ष
बिहार का बिजली विभाग डिजिटल नहीं हुआ —
वह डिजिटल लूट बन चुका है।
