समस्तीपुर (बिहार) — कानून की किताबें कहती हैं कि पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए होती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई बार-बार इस कथन को झूठा साबित कर रही है।
समस्तीपुर ज़िले के ताजपुर थाना क्षेत्र से सामने आया ताज़ा मामला सिर्फ एक युवक के साथ हुई कथित बर्बरता नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की पुलिस व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है।
क्या है पूरा मामला (तथ्यात्मक पक्ष)
वेब पर उपलब्ध और प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार—
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एक युवक को सोने की दुकान में चोरी के शक में ताजपुर पुलिस ने हिरासत में लिया
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आरोप है कि युवक को लगभग 5 दिनों तक अवैध रूप से थाने में रखा गया
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इस दौरान बुरी तरह पिटाई की गई
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पीड़ित का दावा है कि उसके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाले जाने और सूई से उत्पीड़न जैसी अमानवीय हरकतें की गईं
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संविधान के अनुसार 24 घंटे में कोर्ट में पेश करने का नियम पूरी तरह तोड़ा गया
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5 जनवरी को जब हालत गंभीर हुई, तब उसे छोड़ दिया गया और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा
मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच का आदेश देने की बात कही है। पुलिस पक्ष ने आरोपों से इनकार भी किया है, लेकिन जांच अभी जारी है।
सवाल जो सिर्फ ताजपुर तक सीमित नहीं
यह मामला कोई अपवाद नहीं है।
कोविड काल में तमिलनाडु में मोबाइल रिचार्ज विवाद पर पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की मौत पूरे देश ने देखी।
आज ताजपुर, कल कोई और थाना — जगह बदल जाती है, तरीका वही रहता है।
सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुँचते हैं कुछ ही मामले?
जब किसी मामले में:
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राजनीतिक टकराव हो
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पार्टी पॉलिटिक्स जुड़ जाए
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मीडिया का राष्ट्रीय दबाव बने
तभी ऐसे केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच पाते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि जो गरीब, कमजोर और राजनीतिक रूप से अकेले हैं — उनका क्या?
Opinion | पुलिस किसकी है?
सबसे बड़ा सवाल यही है:
पुलिस आखिर किसकी है?
किसी नेता की?
किसी अमीर व्यापारी की?
या फिर उस आम नागरिक की, जिसने टैक्स देकर उसे वर्दी पहनाई?
अगर पुलिस सच में जनता की होती,
तो थाने यातना-गृह नहीं बनते।
शपथ बनाम सच्चाई
पुलिस शपथ लेती है:
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संविधान की रक्षा की
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नागरिकों की सुरक्षा की
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कानून के अनुसार कार्य करने की
लेकिन जब सरकारी नौकरी को:
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देश सेवा नहीं, सिर्फ कमाई और रौब का साधन मान लिया जाए
तो न्याय और नैतिकता दोनों दम तोड़ देते हैं।
Aware News 24 की साफ़ बात
हमें पता है:
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इस खबर को भी कई लोग देखकर आगे बढ़ जाएँगे
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शायद शेयर न करें
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शायद कुछ लोग कहेंगे — “ये सब तो चलता रहता है”
लेकिन Aware News 24 का धर्म साफ़ है:
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गलत को गलत कहना
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सही को सही कहना
हम कहते-कहते मर जाएँगे,
लेकिन सत्य और न्याय का पक्ष नहीं छोड़ेंगे।
✍️ रिपोर्ट: Aware News 24 | विशेष रिपोर्ट
(यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स व पीड़ित के आरोपों पर आधारित है। जांच प्रक्रिया जारी है।)



