अंतरिक्ष में रह रहे वैज्ञानिकों के लिए किस समय शुरू होगा न्‍यू ईयर? जानें दिलचस्‍प तथ्‍य

इस वीकेंड पूरी दुनिया नए साल (New Year 2023) का स्‍वागत करेगी। दुनियाभर में नए साल के जश्‍न से जुड़ी तैयारियां की जा रही हैं। यह जश्‍न हर देश में अलग-अलग समय पर होगा, जब उनके यहां घड़ी में रात के 12 बजेंगे और 1 जनवरी का आगाज होगा। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में रह रहे हमारे वैज्ञानिक नए साल का जश्‍न कब मनाएंगे। इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर सवार अंतरिक्ष यात्रियों में भी नए साल के स्‍वागत की वही उत्‍सुकता होगी, जो आपके अंदर पृथ्‍वी पर रहते हुए हो रही है। आइए जानते हैं कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर नए साल का आगाज कब होगा। 

इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन को अंतरिक्ष यात्रियों का दूसरा घर भी कहा जाता है। यह स्‍पेस स्‍टेशन कई देशों का जॉइंट प्राेजेक्‍ट है, जिसमें अमेरिका और रूस जैसे प्रतिद्वंदी भी शामिल हैं। इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर हर समय अंतरिक्ष यात्रियों की एक टीम तैनात रहती है और वहां से अपने मिशनों को अंजाम देती है। 

जानकारी के अनुसार, इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन लगभग 7.6 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इसे और आसानी से समझना हो तो, अंतरिक्ष स्टेशन दिन में 16 बार पृथ्वी की परिक्रमा करता है यानी वहां रह रहे अंतरिक्ष यात्रियों के सामने 16 सूर्योदय और सूर्यास्त होते हैं। 

जैसा कि हमने आपको बताया इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर कई देशों के यात्री मौजूद होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, जापान आदि शामिल हैं। इन देशों में अलग-अलग समय पर नए साल का जश्‍न मनाया जाता है। जब इन देशों के यात्री पृथ्‍वी से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष स्‍टेशन में हैं, तो वह नए साल का जश्‍न कब मनाएंगे।   

रिपोर्टों के अनुसार, इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री 1 जनवरी 2023 को भारतीय समय के अनुसार सुबह 5.30 बजे नया साल सेलिब्रेट करेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि ISS यूनिवर्सल कोऑर्डिनेटेड टाइम का पालन करता है, जिसे ग्रीनविच मीन टाइम भी कहा जाता है। यह टाइम, सेंट्रल यूरोपियन टाइम से एक घंटा और भारत के समय से साढ़े पांच घंटा पीछे है। यानी 1 जनवरी की सुबह जब आप सोकर उठेंगे या सो रहे होंगे, तब आईएसएस पर सवार अंतरिक्ष यात्री नए साल में दाखिल होंगे। अभी आईएसएस पर 7 अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं। इनमें रूस, अमेरिका और जापान के अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। 
 

By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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