वसीम अकरम की फाइल इमेज© ट्विटर

दिग्गज तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए अपने पूर्व पाकिस्तानी साथी सलीम मलिक पर उनके करियर के शुरूआती दौर में नौकर की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया है। 1984 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले अकरम ने कहा कि सीनियर टीम के साथी मलिक ने उनसे मालिश कराई और उनके कपड़े और जूते साफ किए। अकरम ने यह खुलासा अपनी बायोग्राफी ‘सुल्तान: ए मेमॉयर’ में किया है। “वह मेरे कनिष्ठ दर्जे का फायदा उठाता था। वह नकारात्मक, स्वार्थी था और मेरे साथ एक नौकर की तरह व्यवहार करता था। उसने मांग की कि मैं उसकी मालिश करूं, उसने मुझे अपने कपड़े और जूते साफ करने का आदेश दिया,” जीवनी का एक अंश पढ़ें।

“मैं गुस्से में था जब रमीज, ताहिर, मोहसिन, शोएब मोहम्मद में टीम के कुछ युवा सदस्यों ने मुझे नाइट क्लबों में आमंत्रित किया।” अकरम 1992 से 1995 तक मलिक की कप्तानी में खेले और ऐसी खबरें थीं कि दोनों खिलाड़ियों के संबंध अच्छे नहीं थे।

हालांकि, मलिक ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अकरम ने ये सब अपनी किताब के प्रचार के लिए लिखा था।

पाकिस्तानी मीडिया ने मलिक के हवाले से कहा, “मैं उन्हें फोन करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं उनसे पूछूंगा कि उन्होंने जो लिखा, उसका कारण क्या था।”

“अगर मैं संकीर्ण सोच का होता, तो मैं उसे गेंदबाजी करने का मौका नहीं देता। मैं उससे पूछूंगा कि उसने मेरे बारे में ऐसी टिप्पणी क्यों लिखी।”

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By MINIMETRO LIVE

Minimetro Live जनता की समस्या को उठाता है और उसे सरकार तक पहुचाता है , उसके बाद सरकार ने जनता की समस्या पर क्या कारवाई की इस बात को हम जनता तक पहुचाते हैं । हम किसे के दबाब में काम नहीं करते, यह कलम और माइक का कोई मालिक नहीं, हम सिर्फ आपकी बात करते हैं, जनकल्याण ही हमारा एक मात्र उद्देश्य है, निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने पौराणिक गुरुकुल परम्परा को पुनः जीवित करने का संकल्प लिया है। आपको याद होगा कृष्ण और सुदामा की कहानी जिसमे वो दोनों गुरुकुल के लिए भीख मांगा करते थे आखिर ऐसा क्यों था ? तो आइए समझते हैं, वो ज़माना था राजतंत्र का अगर गुरुकुल चंदे, दान, या डोनेशन पर चलती तो जो दान देता उसका प्रभुत्व उस गुरुकुल पर होता, मसलन कोई राजा का बेटा है तो राजा गुरुकुल को निर्देश देते की मेरे बेटे को बेहतर शिक्षा दो जिससे कि भेद भाव उत्तपन होता इसी भेद भाव को खत्म करने के लिए सभी गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चे भीख मांगा करते थे | अब भीख पर किसी का क्या अधिकार ? आज के दौर में मीडिया संस्थान भी प्रभुत्व मे आ गई कोई सत्ता पक्ष की तरफदारी करता है वही कोई विपक्ष की, इसका मूल कारण है पैसा और प्रभुत्व , इन्ही सब से बचने के लिए और निष्पक्षता को कायम रखने के लिए हमने गुरुकुल परम्परा को अपनाया है । इस देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज और कठिनाई को सरकार तक पहुचाने का भी संकल्प लिया है इसलिए आपलोग निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन करने के लिए हमे भीख दें 9308563506 पर Pay TM, Google Pay, phone pay भी कर सकते हैं हमारा @upi handle है 9308563506@paytm मम भिक्षाम देहि

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