बैरगिया नाला जुलुम जोर

बैरगिया नाला जुलुम जोर। तहं साधु भेष में रहत चोर। बैरागिया से कछु दूर जाय। एक ठग बैठा धूनी रमाय। कछु रहत दुष्ट नाले के पास। कछु किए रहत नाले में वास। सो साधु रूप हरिनाम लेत। निज साथिन को संकेत देत। जब जानत एहिके पास दाम। तब दामोदर को लेत नाम। जब बोलत एक … Continue reading बैरगिया नाला जुलुम जोर