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रामायण पर कौन सी पुस्तक पढ़ी जाये? ये एक ऐसा प्रश्न है जो इसलिए उठता है क्योंकि राम-कथा लोगों ने टीवी पर देखी होती है, उसके बारे में लोगों से सुना होता है, और इस क्रम में उनका ध्यान चला जाता है कि जो टीवी पर दिखाया जा रहा था, वो पूरा सच नहीं था। उसमें किसी स्क्रिप्ट के हिसाब से तोड़ फोड़ की गयी थी। जो लोग राम-कथा के बारे में बता भी रहे होते हैं, उनकी अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाएं हो सकती हैं। ऐसे लोग अपने हिसाब से कथा के हिस्सों को तोड़ेंगे, मरोड़ेंगे, अपना एजेंडा सेट करने की कोशिश करेंगे। जाहिर है इन सबसे बचने के लिए सीधे रामचरितमानस, या फिर वाल्मीकि रामायण पढ़ लेना एक अच्छा विकल्प होगा। वहाँ समस्या ये है कि कई बार लोगों को लगता है कि ये तो इतनी मोटी किताबें हैं, किसी और भाषा से अनुवाद का स्तर क्या होगा ये पता नहीं। तो आज हम लोग चार-पांच ऐसी पुस्तकों की बात कर रहे हैं, जिनसे राम कथा से किसी दुर्भावनापूर्ण छेड़-छाड़ के डर के बिना पढ़ सकते हैं।

 

सबसे पहले हम उस किताब की बात करेंगे जो सबसे आसानी से अंग्रेजी में उपलब्ध है। ये है सी राजगोपालाचारी की लिखी हुई रामायण। ये आसानी से ऑनलाइन मिल जाएगी। अगर आपके शहर में कोई गाँधी आश्रम हो, या विनोबा भावे का आश्रम हो तो वहाँ जो किताबों की दुकान होती है, वहाँ भी सी राजगोपालाचारी की रामायण आसानी से उपलब्ध होती है। ध्यान रखिये कि ये पूरी रामायण नहीं है, इसमें मुख्य अंशों का अनुवाद है। संक्षिप्त है, इसलिए 12 से 15 वर्ष के बच्चों को उपहार के रूप में देने के लिए ये एक अच्छा विकल्प है। ऐसी ही एक और किताब आर.के. नारायणन की भी है, जो कि जाने-माने लेखक थे। ये भी बहुत ही संक्षित्प रूप है, जो छोटे बच्चों को रामायण की कहानियां सुनाने में काम आ सकती है।

रामायण से सम्बंधित दूसरी किताब होगी कामिल बुल्के की लिखी “रामकथा”। ये बच्चों के लिए नहीं है, बड़ों के लिए है। इसमें सीधे रामकथा नहीं है बल्कि रामकथा से सम्बन्ध रखने वाली पुस्तकों की चर्चा है। ये चार भागों में विभक्त है । पहले भाग में ‘प्राचीन रामकथा साहित्य’ की चर्चा की गयी है। इस भाग में पाँच अध्याय हैं जिनमें सबसे पहले वैदिक साहित्य और रामकथा की बात है। फिर वाल्मीकिकृत रामायण की बात है। उसके बाद महाभारत में जो तीन-चार बार रामकथा सुनाई गयी है, उसकी बात की गयी है। फिर बौद्ध रामकथा और जैन रामकथा से सम्बंधित कथाओं की बात की गयी है।

 

दूसरे हिस्से में रामकथा की उत्पत्ति की बात की गयी है और इसके चार अध्याय हैं। इनमें सबसे पहले में दशरथ की समस्या, फिर रामकथा के मूल स्रोत के सम्बन्ध में विद्वानों के मत, उसके बाद प्रचलित वाल्मीकीय रामायण के मुख्य प्रक्षेपों तथा रामकथा के प्रारम्भिक विकास पर विचार किया गया है । तीसरे भाग में हाल के दौर में रामकथा साहित्य पर एक दृष्टि है । इसमें भी चार अध्याय हैं । पहले और दूसरे अध्याय में संस्कृत के धार्मिक और ललित साहित्य में पायी जानेवाली रामकथा सम्बन्धी सामग्री की बात की गयी है। तीसरे अध्याय में संस्कृत के अलावा दूसरी भारतीय भाषाओँ के रामकथा सम्बन्धी साहित्य का विवेचन है। इसमें हिन्दी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली, काश्मीरी, सिंहली जैसी कई भाषाओँ के साहित्य में रामकथा पर लिखा गया है । चौथे अध्याय में विदेशों में पाये जाने वाले रामकथा के रूप का सारांश है और इस सम्बन्थ में तिब्बत, इंडोनेशिया, चीन, आदि में उपलब्ध सामग्री का परिचय मिल जाता है।

 

पुस्तक के अन्तिम यानि कि चौथे भाग में रामकथा सम्बन्धी एक-एक घटना को लेकर उसका पृथक-पृथक विकास दिखलाया गया है । घटनाएँ काण्ड-क्रम से ली गयी हैं। रामायण में सात कांड होते हैं, इसलिए यह भाग सात अध्यायों में बांटा गया है। अंत में इसमें रामकथा की व्यापकता, विभिन्न रामकथाओं की मौलिक एकता, प्रक्षिप्त सामग्री की सामान्य विशेषताएँ, विविध प्रभाव तथा विकास पर दृष्टि डाली गयी है। इतने पर आपको अंदाजा हो गया होगा कि हमने इसे बच्चों की नहीं, बड़ों की पुस्तक शुरू में ही क्यों कहा था। ये साढ़े छह सौ पन्नों से अधिक की मोटी सी किताब है। अगर रामायण के विषय में आप अपनी जानकारी बढ़ाना चाहते हैं, अलग-अलग कथाएँ कैसे आयीं, कहाँ से आ गयीं, ये समझना चाहते हैं, तो इस पुस्तक को पढ़ने पर विचार कर सकते हैं।

 

रामायण से सम्बंधित मेरी तीसरी पुस्तक है “अभ्युदय” जिसे श्री नरेंद्र कोहली जी ने लिखा था। ये सीधे सीधे रामायण नहीं है, न ही ये संक्षिप्त अनुवाद इत्यादि की श्रेणी में आयेगा। ये रामायण के आधार पर लिखा गया एक उपन्यास है। आप सोचेंगे कि उपन्यास है तो फिर इसे पढ़ने की सलाह क्यों? उपन्यास में तो कथा से बदलाव करने की संभावना रहती है! नरेंद्र कोहली जी ने मूल कथा से कोई छेड़-छाड़ नहीं की है। ये अवश्य है कि आधुनिक युग में रामकथा को पढ़ने वालों को दैवी चमत्कारों पर कोई विशेष विश्वास नहीं होता। इसलिए नरेंद्र कोहली जी ने क्या हुआ होगा, इसे थोड़े मानवीय स्तर पर देखने का प्रयास किया है। युवा पाठक वर्ग के लिए ये पुस्तक रोचक होगी। दो भागों में आने वाली “अभ्युदय” ठीक-ठाक मोटी पुस्तक कही जा सकती है, लेकिन ये काफी रोचक शैली में लिखी गयी है, इसलिए इसे काफी तेजी से पढ़ा जा सकता है।

 

हाल के दौर में रामायण पर एक और अच्छा उपन्यास लिखा गया है। तीन भागों में सुलभ अग्निहोत्री ने राम-रावण गाथा लिखी है। ये उपन्यास “पूर्व पीठिका” नाम के उपन्यास से शुरू होता है। श्री राम के जन्म से काफी पहले राक्षसों और देवताओं के युद्ध हो रहे थे। शक्ति का संतुलन कैसे बना हुआ था, रघुकुल और राक्षसों के वंश, पीढ़ी दर पीढ़ी कैसे आगे बढ़ रहे थे, उनके ऊपर लिखा गया उपन्यास है “पूर्व पीठिका”। ये सीधा राम कथा से सम्बंधित नहीं बल्कि रामायण और पुराणों इत्यादि के अनुसार रामकथा की भूमिका तैयार कैसे हुई उनपर लिखा हुआ है। यहाँ गौतम-अहिल्या, बाली-सुग्रीव, केसरी-अंजना-हनुमान, और दशरथ की कथाएँ आती हैं। रावण का वंश सुमाली पर आरंभ किया गया है। ध्यान रहे कि ये पुराणों और रामकथा पर आधारित दूसरे ग्रंथों से भी प्रेरित है। ये खंड सीता के जन्म पर समाप्त हो जाता है। दोबारा याद दिला दें, ये पुराणों पर आधारित जरूर है, लेकिन ये काल्पनिक उपन्यास है।

 

श्री राम के जन्म से पहले ही रावण की शक्ति का उदय हो चुका था इसलिए दूसरा भाग “दशानन”, रावण की कहानी को लेकर आगे बढ़ता है। रामकथा के खलनायक के रूप में रावण का उदय होने से पहले, रावण ने कई संग्राम जीते थे। छल-कपट और कूटनीति के माध्यम से भी उसने अपनी शक्ति का विस्तार किया था। कहा जा सकता है कि जब श्री राम दंडकारण्य के लिए ऋषि विश्वामित्र के साथ निकलते हैं उस समय तक रावण अपनी शक्ति के शिखर पर पहुँच चुका था। इस वजह से इस खंड में रामकथा के मूल पात्र तो हैं, लेकिन उनकी बात बहुत कम हुई है। मूलतः ये रावण के दशानन बन जाने की कथा है। रामकथा में रूचि हो तो इसे पढ़ा जा सकता है। तीसरे खंड “राम” में राम की कथा आती है। यहाँ भी श्री राम को अलौकिक के दायरे से निकालकर मानवीय स्तर पर लाने का प्रयास किया गया है। राज्याभिषेक से वनवास पर पहुँच जाने के दौरान कैकेयी को एक अलग रूप में दर्शाया गया है। ये तीनों काल्पनिक उपन्यास हैं, जिनमें श्री राम और उस काल के पात्रों का मानवीय पहलू अधिक देखा गया है। पहले से रामकथा में रूचि हो, या रूचि जगाना चाहते हों, तो इसे भी पढ़ा जा सकता है।

 

इस भाग में हमने रामायण के संक्षिप्त रूप, रामायण के अनुशीलन या फिर उसपर आधारित, पुस्तकों की बात की है। कुछ ऐसा ही वीडियो हमने महाभारत के लिए भी बना रखा है, आप चाहें तो उसे भी देख सकते हैं। अगले वीडियो में हमलोग सीधे रामायण पर चलेंगे, और अलग-अलग काल में लिखी गयी रामायण की बात करेंगे। तबतक के लिए, आज्ञा दीजिये।

By anandkumar

आनंद ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की है और मास्टर स्तर पर मार्केटिंग और मीडिया मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। उन्होंने बाजार और सामाजिक अनुसंधान में एक दशक से अधिक समय तक काम किया। दोनों काम के दायित्वों के कारण और व्यक्तिगत हित के रूप में उन्होंने पूरे भारत में यात्रा की। वर्तमान में, वह भारत के 500+ जिलों में अपना टैली रखता है। पिछले कुछ वर्षों से, वह पटना, बिहार में स्थित है, और इन दिनों संस्कृत में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रहें है। एक सामग्री लेखक के रूप में, उनके पास OpIndia, IChowk, और कई अन्य वेबसाइटों और ब्लॉगों पर कई लेख हैं। भगवद् गीता पर उनकी पहली पुस्तक "गीतायन" अमेज़न पर लॉन्च होने के पांच दिनों के भीतर स्टॉक से बाहर हो गई।

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